गोरखपुर। छावनी से नरकटियागंज तक जाने वाली (55048) पैसेंजर ट्रेन पिपराइच स्टेशन पर रोकने के बजाय मेन लाइन पर ग्रीन सिग्नल देने की जांच पूरी हो गई है। जांच में पिपराइच स्टेशन मास्टर को दोषी पाया गया है। अब जल्द ही विभागीय कार्रवाई हो सकती है। इस मामले में पहले ही गार्ड की ड्यूटी ट्रेन से हटाकर स्टेशन से संबद्ध कर दिया गया है।
बीते रविवार को छावनी से नरकटियागंज जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को पिपराइच स्टेशन पर रोकने के बजाय मेन लाइन पर ग्रीन सिग्नल दे दिया गया। मेन लाइन के लिए ग्रीन सिग्नल देख लोको पायलट ने गार्ड को जानकारी दी और सहमति होने पर ट्रेन को होम सिग्नल के पहले रोक दिया। करीब 40 मिनट बाद पिपराइच स्टेशन पर पायलट कर ट्रेन को लाया गया गया।
मामले की जानकारी होने के बाद वाराणसी मंडल के परिचालन विभाग में ट्रेन के लोको पायलट, गार्ड और पिपराइच के स्टेशन मास्टर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। तीनों से बारीकी से पूछताछ की गई।
जानकारी के अनुसार, लोको पायलट और गार्ड ने प्लेटफाॅर्म लाइन न मिलने से ट्रेन आउटर पर ही रोक लिया। आपत्ति करने के बाद स्टेशन मास्टर ने प्लेटफाॅर्म के लिए सिग्नल दिया। इस प्रकरण में जांच टीम ने गार्ड और लोको पायलट की गलती नहीं मानी नहीं है। वहीं, मेन लाइन के लिए सिग्नल दे दिए जाने के बाद उसे हटा देने और कंट्रोल को इस बात की सूचना नहीं दिए जाने के लिए स्टेशन मास्टर को दोषी माना गया है। इस मामले में रेल प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।