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Gorakhpur News: स्टांप डयूटी घोटालाः पांच और फाइलें डीएम कोर्ट पहुंचीं...अब 24 को सुनवाई

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- 100 करोड़ के स्टांप घोटाले में एक अप्रैल को एडीएम एफआर कोर्ट में भी होगी छह मामलों की सुनवाई
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- पॉवर ऑफ अटार्नी में कम स्टांप ड्यूटी लगाने के मामले में रामेश्वर त्रिपाठी पर दर्ज हैं 15 मुकदमे

अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। नेपाल के थापा परिवार से पावर ऑफ अटार्नी लेने में 100 करोड़ की स्टांप ड्यूटी कम लगाने के मामले में केस दर्ज होने के बाद अब कोर्ट में सुनवाई होगी। कुल 15 डीड में निबंधन कार्यालय ने केस दर्ज कराया है। मंगलवार को पांच और फाइलें डीएम कोर्ट में भेज दी गई। 24 मार्च को नौ मामलों की सुनवाई डीएम कोर्ट में, जबकि छह मामलों की सुनवाई एक अप्रैल को एडीएम वित्त एवं राजस्व के कोर्ट में होगी।



पावर ऑफ अटार्नी लेने वाले रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी को निबंधन कार्यालय से नोटिस भेजा जा चुका है। अभी तक उनकी तरफ जवाब नहीं दिया गया है। उधर, पावर ऑफ अटार्नी कराने वाले प्रयागराज के रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी अध्यादेश को देर से सार्वजनिक किए जाने का मामला बताकर हाईकोर्ट में चुनौती की तैयार कर रहे हैं। इस पूरे मामले में रामेश्वर त्रिपाठी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
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नेपाल के काठमांडो में रहने वाले थापा परिवार की जंगल सिकरी उर्फ खोराबार तहसील की 21 गाटाओं में कुल 7.152 हेक्टेयर, मौजा जंगल अयोध्या प्रसाद, सदर तहसील में 2.2 हेक्टेयर जमीन एवं नसीराबाद सिटी में एक कोठी है। इसे बेचने का अधिकार नेपाल के इस परिवार से 27, 28 दिसंबर 2023 और तीन जनवरी 2024 को प्रयागराज अल्लाहपुर के शिवनगर काॅलोनी निवासी रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी की फर्म एसआर सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड ने डीड के जरिए लिया। इसमें 100 रुपये के स्टांप पर 500 निबंधन शुल्क जमा किया गया, जबकि 27 दिसंबर 2023 को नया अध्यादेश लागू हो गया। इस मामले में अधिवक्ता पीपी पांडेय ने जनसुनवाई पोर्टल पर स्टांप ड्यूटी कम लगाने की शिकायत कर दी। मामले की जांच सहायक निबंधक कार्यालय से कराई गई। उप निबंधक प्रथम और उप निबंधक द्वितीय कार्यालय से हुई डीड की जांच की गई तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद स्टांप व निबंधन शुल्क का निर्धारण किया गया। पाया गया कि प्रत्येक डीड में स्टांप व निबंधन शुल्क के रूप में 6,84,78,120 रुपये कम जमा किया गया है। इसके बाद सभी 15 डीड के मामले में भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 47 क तहत वाद पंजीकृत कराया गया।







खातेदार का नाम अलग न होने से बढ़ी स्टांप व निबंधन शुल्क



थापा परिवार से हुई पावर ऑफ अटार्नी में एक चूक हुई है, जिसके चलते स्टांप व निबंधन शुल्क की रकम बढ़ गई है। सभी 15 डीड में यह कहीं न लिखा गया है कि कुल जमीन में किसका, कितना हिस्सा है। डीड अलग-अलग होने के चलते केस भी अलग-अलग दर्ज कराए गए। यही कारण है कि सभी मामले में 6,84,78,120 रुपये शुल्क कम जमा होना दिखाया गया है। यानी एक ही जमीन का 15 बार मूल्यांकन हो गया। खाता अगर अलग होता तो 6,84,78,120 रुपये का प्रापर्टी के हिसाब से शुल्क तय होता।







वर्जन



पावर ऑफ अटार्नी के 15 मामलों मिले थे जिसमें स्टांप और निबंधन शुल्क कम जमा किया गया है। संबंधित व्यक्ति से कम जमा हुए स्टांप व निबंधन शुल्क जमा करने की कार्रवाई शुरू की गई है। केस दर्ज करा दिया गया है। अब कोर्ट में सुनवाई चलेगी।
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-प्रदीप राणा, सहायक महानिरीक्षक निबंधन



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नए अध्यादेश में बाजार के हिसाब से तय हो रहा शुल्क



28 दिसंबर 2023 को पावर ऑफ अटार्नी को लेकर नया अध्यादेश लागू हुआ है। इस अध्यादेश में परिवार के सदस्य के लिए शुल्क पांच हजार रुपये कर दिया गया, जबकि परिवार से अलग किसी व्यक्ति को पावर ऑफ अटार्नी देने अचल संपत्ति, जो अधिकार देने वाले की हो, बाजार मूल्य के समान शुल्क देय होगा। वहीं, पहले स्टांप शुल्क 100 रुपये और निबंधन शुल्क 500 रुपये था।
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