गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के खिलाफ मिली ऐतिहासिक सफलता को दस्तावेजी रूप देने की पहल की है। कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन (सीएफएम) विभाग की ओर से आयोजित उच्चस्तरीय हितधारक बैठक में चार जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों, विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर वर्षों के अनुभव और सफल रणनीतियों को साझा किया।
बैठक की अध्यक्षता गोरखपुर मंडल के संयुक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. अरुण गर्ग ने की। इसमें गोरखपुर एम्स की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता मुख्य अतिथि रहीं। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में जेई-एईएस की कहानी अब केवल संघर्ष नहीं बल्कि बहु-क्षेत्रीय समन्वय और जनस्वास्थ्य की उल्लेखनीय सफलता का उदाहरण बन चुकी है। यह दस्तावेज भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों के लिए साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शिका तैयार करेगा।
मुख्य अन्वेषक डॉ. अनिल कोपरकर ने बताया कि परियोजना के तहत जेई-एईएस नियंत्रण में मिली सफलता के पीछे की रणनीतियों, नवाचारों और सामुदायिक भागीदारी का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण किया जाएगा। इससे यह मॉडल देश और दुनिया के अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकेगा। बैठक में आईसीएमआर-एनआईएचआर के निदेशक डॉ. हरीशंकर जोशी, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. धर्मेंद्र कुमार, गोरखपुर के सीएमओ डॉ. राजेश झा, महराजगंज के सीएमओ डॉ. सुरेंद्र चौधरी, वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अनीता मेहता, डॉ. राजकिशोर सिंह, डॉ. अमरीश सिंह, डॉ. महिमा मित्तल एवं एम्स गोरखपुर के विभिन्न विभागों के अनेक चिकित्सकगण शामिल रहे।