सिसवा के कपड़ा व्यवसायी कृष्णचंद अग्रवाल बुधावार को बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि बाबू जी का सपना था कि उनके जीते जी श्रीराम मंदिर बने। लेकिन शिलान्यास हुआ तो आज उनकी आत्मा का शांति मिली होगी। उन्होंने बताया पिता सीताराम गुब्बार बेचते हुए अयोध्या तक पहुंचे थे। बाबू जी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सक्रिय कार्यकर्ता और विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष थे। 6 दिसंबर 1992 को ढाचा गिरने के दौरान अयोध्या में ही थे। आज बहुत अच्छा लग रहा कि श्रीराम मंदिर का शिलान्यास हो गया।
तहसील गेट से हुई थी गिरफ्तारी
बजरंग दल के पूर्व जिला संयोजक रमेश मोदनवाल ने बताया कि वर्ष 1992 का संघर्ष रोमांचकारी रहा। तीन बार गिरफ्तारी हुई थी। भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष डॉ. स्व. रविंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में आजाद नगर में रात में बैठक हो रही थी। साथ में शिवकुमार पटवा, रूदल दास, सत्यनारायण, डॉ. आरवी लाल, मोहनलाल निगम, मधुसुदन पाण्डेय आदि रहे। बैठक के बाद तहसील गेट पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।
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सरयू में कूदकर जान बचाए
चोखराज तुलस्यान सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य ज्योतिष मणि त्रिपाठी रामजन्म भूमि आंदोलन से रहे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1991 में राम ज्योति यात्रा को लेकर गांव गांव भ्रमण किया। पुलिस पकड़ने के लिए पीछे पड़ी रहती थी, लेकिन चकमा दे कर भगते रहे। कार सेवा के लिए सिसवा से बस्ती तक रेल गाड़ी फिर पैदल अयोध्या तक यात्रा हुई।
सपा सरकार के दौरान निहत्थे कार सेवकों पर गोली चली थी। उस वक्त सरयू नदी में कूद कर जान बचाकर भागा था। 6 दिसंबर वर्ष 1992 में विवादित ढांचा गिराया गया था। तब भी अयोध्या पहुंचा था। आज जब प्रधानमंत्री श्रीराम मंदिर का शिलान्यास किए तो ह्रदय में असीम सुख की प्राप्ति हो रही है।