सिविल कोर्ट बार के अधिवक्ता संदीप गुप्ता ने बताया कि विधि की पढ़ाई कर रहा था तो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में पुस्तकें उपलब्ध थीं, लेकिन जब प्रैक्टिस करने आया तो यहां अलग अनुभव हुआ। हिंदी के बगैर तो कोई वकालत कर ही नहीं सकता है। उदाहरण के तौर पर आप कितने ही बड़े वकील हों, अगर अपने मुवक्किल से अंग्रेजी में बात करेंगे तो दोबारा वह आपके पास नहीं आएगा।
अधिवक्ता ने बताया कि मेरे कई अधिवक्ता साथी हैं, जिनकी हिंदी कमजोर है। वे समझने के लिए हमारे पास आते हैं। हिंदी ऐसी भाषा है जिसमें सहजता से लोगों को बातें समझाई जा सकती हैं। मेरा इतना ही कहना है कि आप कई भाषा जानिए, अच्छी बात है, लेकिन हिंदी को जानना और समझना बहुत जरूरी है।
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हिंदी के बगैर ज्योतिष है अधूरा
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि संस्कृत का ज्ञान बहुत कम लोगों को है। जबकि हिंदी आम जनमानस की भाषा है। हिंदी के बगैर तो ज्योतिष अधूरा है। आज पंचांग से लेकर बहुत सारी ज्योतिष की पुस्तकें हिंदी में उपलब्ध हैं। हर कोई अध्ययन करके ज्योतिष को समझ सकता है। पंचांग को जान सकता है।
अपने त्योहार और शुभ मुहूर्त के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है। यही नहीं, आज के समय में ज्योतिष को करियर बनाने के लिहाज से कई विश्वविद्यालयों में कोर्स चलाए जा रहे हैं। यह करियर के लिए भी बेहतर विकल्प बन सकता है, लेकिन तभी जब आपको हिंदी की अच्छी जानकारी होगी।