कोरोना की मार से अब गोरखपुर के पावरलूम उद्योग काफी हद तक उबर गए हैं। पहले जब स्कूलों में ही ड्रेस की खरीदारी होती थी, तब तक स्कूल स्तर पर ही कपड़ों की खरीद होती थी। लेकिन जब से बच्चों के अभिभावकों के खातों में पैसे जाने लगे तब से स्थिति थोड़ी खराब हुई है। सरकार की नीतियों की वजह से इसमें थोड़ा सुधार हुआ है। प्रत्येक दिन एक हजार मीटर तक कपड़े तैयार कर लिए जा रहे हैं।- हबीब अहमद अंसारी, जामिया नगर, रसूलपुर
कोरोना काल से लेकर पिछले साल तक गोरखपुर के बुनकरों की स्थिति काफी विकट हो गई थी। लेकिन अब इसमें सुधार हुआ है। स्कूल ड्रेस तैयार करने वाले रेडीमेड गारमेंट उद्यमियों की ओर से पैंट के कपड़ों की काफी मांग है। जिसको पूरा करने में पावरलूम के ताने-बाने दिन-रात दौड़ते रहते हैं। ऐसे में स्थितियां थोड़ी बेहतर हुई हैं। हालांकि बुनकरों की स्थिति को बेहतर करने के लिए सरकार को कुछ और कदम उठाने चाहिए।- मोहम्म्द खलीक, बुनकर
गोरखपुर के टेक्सटाइल उद्योगों में तैयार होने वाले कपड़े की गुणवत्ता काफी बेहतर रहती है। न सिर्फ उत्तरप्रदेश के बल्कि देश के अन्य राज्यों में इनकी सप्लाई होती है। इसमें पावरलूम उद्योगों की भी बड़ी भूमिका है। मात्र चार साल पहले यहां पांच से छह हजार पावरलूम चलते थे। धीरे धीरे इनकी संख्या घटकर डेढ़ हजार रह गई थी। अब फिर से संख्या बढ़ रही है। स्कूल के पैंट के कपड़ों की मांग बढ़ गई है।- दीपक कारीवाल, उद्यमी
छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस
लघु और कुटीर उद्योगों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश भर में हर साल 30 अगस्त को छोटे उद्योगों को उनकी समग्र विकास क्षमता और वर्ष में उनके विकास के लिए प्राप्त अवसरों के समर्थन और बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस के रूप में मनाया जाता है।