गोरखपुर जेल में बंद कैदियों की बनाई हुई वर्दी प्रदेश के अन्य जेलों में भेजी जाती है। जिससे गोरखपुर जेल की कमाई होती है। प्रदेश के सभी जेलों के बंदी अलग अलग सामान बनाते हैं। जो आसपास के अन्य जेलों में भेजा जाता है।
इसी क्रम में यंहा के बंदी कैदियों की वर्दी बनाते हैं। जिसके एवज में उन्हें पारिश्रमिक के तौर पर रकम मिलती है। सामान उन्हें जेल प्रशासन मुहैया कराता है। इसके अलावा जेल की महिला बंदी जुट के थैले, पर्स, झोला भी बनाती हैं। जो बाजार में बेचा जाता है।
साथ ही लॉकडाउन में बंदियो ने भारी मात्रा में कपड़े का मास्क बनाया जो कोरोना से बचाव में कोरोना योद्धाओं के काम आया। साथ ही आम लोगों को भी बाजार के जरिए भेजा गया। वंही जेल में बंदियो द्वारा खेती भी होती है। यंहा आलू, फूल गोभी, बंद गोभी आदि उगाई जाती है। यंहा की ब्रोकोली और गोभी पिछले दो वर्षों में लगातार प्रदेश में प्रथम रही हैं।