पहली तैनाती जम्मू कश्मीर में मिली। चार अगस्त 1998 को जंग के दौरान साथियों को बचाने में घायल हुए और पांच अगस्त को उन्हें शहादत हासिल हुई। उनकी बहादुरी को देखते हुए वर्ष 2000 में उनके अदम्य शौर्य और साहस को देखते हुए राष्ट्रपति ने उन्हें सेना मेडल से नवाजा।
गौतम गुरुंग की छोटी बहन मीनाक्षी रक्षाबंधन आने पर तड़प उठती हैं। उन्होंने जिस शाम भाई को भेजने के लिए राखी खरीदी थी, उसी शाम भाई के शहीद होने की खबर आई। वो राखी आज भी मीनाक्षी ने संभाल कर रखी है।
गौतम गुरुंग को समर्पित है तिराहा
कारगिल जंग में जीआरडी इलाके में रहने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर पीएस गुरुंग इसके बाद देहरादून में पैतृक गांव चले गए। भारत नेपाल मैत्री समाज के प्रयास से कूड़ाघाट तिराहे पर गौतम गुरुंग की प्रतिमा लगाई है। अब यह शहीद गौतम गुरुंग तिराहे के नाम से जाना जाता है।