पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्रा ने बताया कि वर्ष-2019 में दिल्ली के अनाम शख्स ने पर्यटन मंत्री को पत्र लिखकर गोरखपुर से गुजरने वाली सरयू नदी के आसपास के इलाकों में प्रभु राम से जुड़ी आध्यात्मिक धरोहरों के होने की बात कही थी। साथ ही उन्हें रामायण सर्किट से जोड़ने का अनुरोध किया।
इसके बाद पर्यटन मंत्री ने मुख्यमंत्री से बात कर गोरखपुर में इसकी संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया। इस पर पर्यटन विभाग ने अयोध्या शोध संस्थान को पत्र लिखकर गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में रामायण काल से जुड़ी धरोहरों की जानकारी मांगी गई थी।
अयोध्या शोध संस्थान की किताब में गोरखपुर के बड़हलगंज स्थित सरयू नदी के किनारे मौजूद लेटाघाट और विश्रामघाट पर प्रभु राम के आगमन और विश्राम की बात कही गई है। पर्यटन विभाग दोनों स्थलों का मुआयना भी कर चुका है।
अयोध्या, श्रृंगवेरपुर, चित्रकूट, सीतामढ़ी, बक्सर, दरभंगा, नंदीग्राम, महेंद्र गिरी, जगदलपुर, भद्राचलम, रामेश्वरम, हंपी, नासिक, नागपुर, चित्रकूट।
क्या है रामायण सर्किट
बुद्ध सर्किट और कृष्ण सर्किट के तर्ज पर भगवान राम से जुड़े स्थलों को आकर्षक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने रामायण सर्किट विकसित करने की योजना बनाई है। इस योजना की घोषणा मई 2015 में केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने लखनऊ में की थी।
हालांकि प्रदेश की सपा सरकार में योजना को लेकर कोई तेजी नहीं दिखाई गई लेकिन जैसे ही भाजपा सरकार सत्ता में आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रामायण सर्किट को विकसित करने का कार्य तेज हो गया है।