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बिना देवी पूजा के नहीं चलता है यह चीनी मिल, नाम है इसका 'हदहदवा भवानी'

Mon, 15 Jun 2020 04:29 PM IST
vivek shukla नीलांबुज मिश्र, देवरिया।

सार

  • जब चीनी मिल नहीं निकला रस तो अंग्रेजों ने कराया था देवी का पूजा
  • वनदेवी से हदहदवा भवानी पड़ा नाम, देवी के पूजा के बाद चलता है चीनी मिल

 
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Deoria news - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश व बिहार के सरहद रामपुर प्रतापपुर फैक्ट्री के पास मां हदहदवा भवानी का मंदिर लोगों के आस्था का केंद्र है। बिना देवी के अराधना किए चीनी मिल नहीं चलता है। यहां मांगी गई भक्तों की मुरादे देवी मां पूरी करती हैं।

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मान्यता है कि जिस स्थान पर यह प्राचीन मंदिर है वहां पहले घना वन था और देवी विराजमान थी। इन्हें वनदेवी के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1903 में अंग्रेजों के हुकूमत में जब यहां चीनी मिल की स्थापना की हुई। गन्ना पेराई के लिए डोंगा में डाला गया तो रस नहीं निकल रहा था।

इसको लेकर मिल प्रबंधन परेशान हो गया, कई दिनों तक चीनी मिल बंद रहा। चीनी मिल में कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों ने माता की महिमा का बखान किया। मिल प्रबंधन तंत्र ने वन देवी के स्थान की साफ-सफाई कराई व उनका विधिवत पूजन अर्चन वैदिक मंत्रों के बीच हुआ। इसके बाद गन्ने से रस आने लगा और इसे एकत्रित करने के लिए लगी टंकी में रस हद-हद करके गिरने लगा।

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धूमधाम से होती है पूजा

इसी के बाद से इस वनदेवी का नाम हदहदवा भवानी पड़ गया। कोलकता का कानोडिया ग्रुप रहा हो या अब बजाज ग्रुप, फैक्ट्री चालू करने के पहले देवी की धूम-धाम से पूजन अर्चन किया जाता है। इसमें थोड़ी सी भी त्रुटि आने पर मिल प्रबंधन को भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

इसके अलावा सप्ताह के सोमवार व शुक्रवार को यहां भक्तों की भीड़ रहती है लेकिन नवरात्र में यहां भक्तों का रेला लगा रहता है। यूपी के देवरिया तो बिहार के सिवान व गोपालगंज जिले से भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मां हदहदवा भवानी भक्तों की मुरादें पूरी करती हैं। मंदिर में यूपी बिहार के लोग मांगलिक कार्य मुंडन, शादी भी करते हैं।
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