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143 साल पहले रेलवे स्टेशन पर बुक स्टॉल खोलने की कहानी है दिलचस्प, जानें कैसे हुई थी इसकी शुरूआत

Wed, 10 Jun 2020 04:32 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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Gorakhpur Railway station - फोटो : अमर उजाला
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रेलवे स्टेशन पर एएच व्हीलर नाम का बुक स्टॉल जरूर देखा होगा, लेकिन इसके खुलने की पटकथा 143 साल पुरानी है। स्टेशन के बुक स्टाल्स पर लिखे ए.एच. व्हीलर का सीधा और गहरा संबंध उत्तर प्रदेश के दो शहरों कानपुर व इलाहाबाद से है।

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दरअसल, 1857 की क्रान्ति के दौर में कानपुर में एक अंग्रेज अधिकारी हुआ करता था जिसका नाम था आर्थर हेनरी व्हीलर यानी एएच व्हीलर। 1857 में बिठुर में भी भीषण क्रान्ति हुई। जिसमें नाना साहब, तात्या टोपे आदि की क्रांति को अंग्रेजों ने बलपूर्वक कुचल दिया।

एएच व्हीलर के नेतृत्व में ही इस विद्रोह को कुचला गया। इस विद्रोह में करीब 24 हजार लोग मारे गए थे। इसी आर्थर हेनरी व्हीलर ने अंग्रेज सेना से रिटायर होने के बाद इंग्लैण्ड में अपनी बुक स्टोर्स की श्रृंखला खोली। इसका नाम उसने रखा ए.एच. व्हीलर बुकस्टोर्स यानी आर्थ हेनरी व्हीलर बुक स्टोर।

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व्हीलर के दामाद मार्टिन ब्रांड और एएच व्हीलर के को-फाउंडर और फ्रांसीसी लेखक एमिली एडवर्ड और मोरे ने टी.के.बनर्जी के साथ मिलकर भारतीय रेलवे स्टेशनों पर एएच व्हीलर के नाम से बुक स्टोर्स खोले। भारत में एएच व्हीलर का पहला स्टॉल 1877 में इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर खुला था। चूंकि तब मार्टिन ब्रांड का एक रिश्तेदार तब अंग्रेजों की रेलवे में बड़ा कॉमर्शियल अधिकारी था।

इसलिए पूरे भारत के रेलवे स्टेशनों पर ए.एच. व्हीलर बुक स्टोर्स खोलने का करार हुआ। कंपनी का दूसरा स्टोर हावड़ा रेलवे स्टेशन और तीसरा नागपुर स्टेशन पर खोला गया। धीरे-धीरे कंपनी का नेटवर्क बढ़ता गया। 1930 में टीके बनर्जी 100 प्रतिशत शेयर लेकर कंपनी के मालिक हो गए। टीके बनर्जी के परपोते और वर्तमान में कंपनी के निदेशक अमित बनर्जी हैं। आज एएच व्हीलर एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में 10 हजार से अधिक लोग नौकरी करते हैं।

इलाहाबाद के मोरे को बुक स्टोर्स खुलने की- किताबों का बहुत शौक था। घर में किताबें इधर-उधर बिखरी रहती थीं। एक दिन उनकी पत्नी ने गुस्से में आकर चेतावनी दे दी की किताबें नहीं हटाई तो उन्हें बाहर फेंक दूंगी।

इसके बाद मोरे ने टीके बनर्जी के सहयोग से रेलवे अधिकारियों से अनुमति लेकर इलाहाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर एक चादर बिछाकर अपनी पुरानी किताबों को भारी छूट पर बेचना शुरू कर दिया। कंपनी में एक प्रतिशत शेयर लंदन की कंपनी एएच व्हीलर का है। तब इसमें 59 प्रतिशत हिस्सा मोरे, 40 प्रतिशत टीके बनर्जी और एक प्रतिशत हिस्सा आर्थ हेनरी व्हीलर (एएच व्हीलर) के दामाद मार्टिन ब्रांड का था।

इस समय देश के 258 रेलवे स्टेशनों पर कंपनी के 378 स्टोर चल रहे हैं।
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