वहीं जेल में जागरूकता का पोस्टर भी चस्पा किया गया है। बैरकों की सफाई करने, बंदियों को साफ कपड़े पहनने, रुमाल रखने, बार-बार हाथ धोने, सर्दी होने पर डॉक्टर से सलाह लेने, स्वच्छ पानी पीने को जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए जगह-जगह बैनर लगाए गए हैं।
वहीं जेल में लगे पब्लिक एड्रेस सिस्टम से भी दिन में तीन बार जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों के दफ्तरों को भी सैनेटाइज किया जा रहा है। पेशी पर जाने वाले बंदियों के वापस लौटने पर उनकी निगरानी और मेडिकल कराया जा रहा है।
पुलिस द्वारा पकड़े गए आरोपितों के जेल जाने पर इंट्री से पहले सर्दी, खांसी व बुखार की जांच कर ही प्रवेश दिया जा रहा है। इन नए बंदियों को पहले चौदह दिन तक अन्य बंदियों से अलग बैरक (मिलेनियम) में रखा जा रहा है। बाद में उन्हें अंदर की बैरक में शिफ्ट किया जा रहा है।
हालांकि यह पहले से होता था मगर कोरोना का प्रकोप देखते हुए इसमें सतर्कता बढ़ा दी गई है और जेल जाने वाले लोगों के सर्दी-खांसी का इलाज किया जा रहा है। साथ ही जेल अस्पताल के डॉक्टरों की सलाह पर अन्य सावधानियां भी बरती जा रही हैं।
जेल के सिलाई उद्योग में शामिल छह बंदी वर्तमान समय में कपड़े का मास्क भी तैयार कर रहे हैं। एक दिन में करीब पचास मास्क तैयार हो रहे हैं। ये मास्क पहले बंदियों, कर्मचारियों, मुलाकातियों को मुहैया कराए जाएंगे। मास्क की संख्या ज्यादा होने पर इसे बाहर बेचा जाएगा। मिली रकम को बंदियों की भलाई के लिए खर्च किया जाएगा।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने कहा कि स्पेशल टीम गठित कर दी गई है। सर्दी-खांसी से पीड़ित बंदियों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही जागरूकता फैलाई जा रही है। मुलाकातियों को भी मास्क लगाकर आने को कहा गया है। बंदियों को साबुन, मास्क आदि बांटा जा रहा है।
मास्क व ग्लव्स लगाकर अपराधियों को पकड़ रही पुलिस
जिले की पुलिस अब अपराधियों को ग्लव्स और मास्क लगाकर पकड़ रही है। साथ ही पकड़े गए आरोपित को सर्दी-खांसी आने पर पुलिस उन्हें पहले इलाज के लिए भेज दे रही है। वहीं कुछ थानों और जिले के एक विशेष अपराध टीम पाकेटमारों व छोटे मोटे केस के आरोपितों को खांसी आने पर ज्यादा देर हवालात में न रखकर उनका इलाज व मेडिकल कराकर उन्हें 34 पुलिस एक्ट में चालान कर जेल भेजवा रही है।
पुलिस का कहना है कि वह कोरोना के चलते रिस्क नहीं लेना चाहती। हवालात में विशेष कर सिर्फ बड़े अपराधियों को ही रखा जा रहा है। मेडिकल में भी चोट के साथ ही सर्दी-खांसी का परीक्षण भी किया जा रहा है। वहीं थाना, पुलिस लाइंस व पुलिस ऑफिस, व अधिकारियों के दफ्तरों के बाहर जागरूकता का पोस्टर चस्पा किया गया है।