स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज दो के तहत गांवों में छूटे लोगों को शौचालय की सुविधा दिलाने, कूड़ा निस्तारण समेत 72 ग्राम पंचायतों को मॉडल ग्राम पंचायत के तौर पर विकसित करने के लिए संबंधित पंचायतों में पांच दिन का कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए जिले से चयनित 50 स्वच्छताग्रहियों को एनेक्सी भवन सभागार में दिया जा रहा तीन दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को समाप्त हो गया। ये स्वच्छताग्रही इन पंचायतों में पांच दिन रहकर अभियान के तहत तय लक्ष्य को पूरा करने में सहयोग करेंगे।
प्रशिक्षण के समापन पर डीएम विजय किरन आनंद ने आश्वस्त किया कि गांव में प्रवास के दौरान स्वच्छताग्रहियों की सुविधाओं का न केवल ध्यान रखा जाएगा बल्कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए हर संभव मदद की जाएगी। स्वच्छताग्रही इन ग्राम पंचायतों में सात बिंदुओं पर ग्रामीणों से सामूहिक संवाद कर उन्हें जागरूक करेंगे।
डीएम ने एनेक्सी सभागार के बाहर जमीन पर ही चित्र बनाकर स्वच्छताग्रहियों को ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन का तरीका बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीडीओ इंद्रजीत सिंह, डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के विषय विशेषज्ञ शशिभूषण सिंह, राकेश सिंह, ग्रामीण सहभागिता प्रशिक्षक कुशल सिंह, ओडीएफ स्थायित्व पर बच्चा सिंह ने कार्यशाला को संबोधित किया।
डीएम ने कहा कि ग्राम पंचायतों को मॉडल ग्राम पंचायत बनाने के लिए ग्राम पंचायतों के निवासियों के व्यवहार परिवर्तन के साथ वहां संचालित प्रत्येक योजना से उनका जुड़ाव भी सुनिश्चित करना होगा। तभी ग्राम पंचायतों में उपलब्ध संसाधनों का समुचित इस्तेमाल, रखरखाव और उसका सामूहिक रूप से लाभ सभी को मिल सकेगा।
इन लक्ष्यों को हासिल करने पर जोर
ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत कार्ययोजना निर्माण जिसमें संपर्क मार्ग, आंतरिक गलियां, खुली नालियां, जलनिकासी को बेहतर नियोजन पर जोर दिया जाएगा। प्रत्येक घर के ठोस एवं तरल अपशिष्ट के प्रबंधन की कार्ययोजना विकसित कर गांव को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने का प्रयास किया जाएगा। ग्राम पंचायत के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में शौचालय, पेयजल, विद्यालय भवन, फर्नीचर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी। ग्राम पंचायतों को कुपोषण मुक्त किए जाने के साथ बच्चों, किशोरियों एवं गर्भवती महिलाओं के जीवन स्तर सुधारने के मद्देनजर आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर संचालन होगा।