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Gorakhpur News: बिजली निगम में स्पेशल ऑडिट शुरू, मंडल पहली बार हो रही ऐसी जांच- बिल सुधार में हुई खूब गड़बड़ी

Sat, 18 May 2024 11:34 AM IST
रोहित सिंह रोहित सिंह,गोरखपुर

सार

सूत्रों ने बताया कि कैश काउंटर से बाबू बिना अवकाश लिए ही गायब होने लगे। ऑडिट टीम ने सबसे पहले ग्रामीण द्वितीय मंडल लिया है। इसमें सिकरीगंज, कौड़ीराम और मोहद्दीपुर ग्रामीण खंड द्वितीय हैं। तय समय अवधि के बिलों के रिकार्ड लिपिक की आईडी से मांगे गए हैं।
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यूपीपीसीएल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मंडल के ग्रामीण द्वितीय खंड में स्पेशल ऑडिट मंगलवार से शुरू हो गई है। पहली बार दोनों जोन के 22 बिजली दफ्तरों( राजस्व खंड) में पहली बार एक साथ बिल सुधार की स्पेशल ऑडिट होगी। इसमें खंड और उपखंड दफ्तरों के कैश काउंटर पर किए गए भुगतान और बिलों का मिलान भी होगा।
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स्पेशल ऑडिट के शुरू होने से निगम के दफ्तरों में हड़कंप मचा है। सूत्रों ने बताया कि कैश काउंटर से बाबू बिना अवकाश लिए ही गायब होने लगे। ऑडिट टीम ने सबसे पहले ग्रामीण द्वितीय मंडल लिया है। इसमें सिकरीगंज, कौड़ीराम और मोहद्दीपुर ग्रामीण खंड द्वितीय हैं।

तय समय अवधि के बिलों के रिकार्ड लिपिक की आईडी से मांगे गए हैं। ये रिकार्ड खंड की तरफ से दिए जाएंगे। ऑडिट टीम के चार्टर्ड एकाउंटेंट( सीए) कुल संशोधित किए गए बिलों में 20 प्रतिशत बिलों की जांच टीम करेंगे। ये बिल खंड की तरफ से ऑडिट टीम को देने होंगे।
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इसके अलावा 5 प्रतिशत संशोधित किए गए बिलों की जांच टीम औचक बिलों को लेकर करेगी। बिलों में गड़बड़ी और बिल सुधार के नाम पर आए दिन शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों का संज्ञान लेकर अक्सर अलग-अलग खंडों में बिलों की स्पेशल ऑडिट की जाती रही है।

लेकिन, ये पहला मौका है कि जब सभी खंडों में एक साथ स्पेशल ऑडिट होने जा रही है। यूपीपीसीएल की तरफ से डेढ़ वर्षों के बिलों को इस ऑडिट में जोड़ा गया है। 2023 अप्रैल से सितंबर तक के बिलों की जांच होगी। इसके अलावा 2022 अप्रैल से 2023 अप्रैल के बिलों की भी जांच की जाएगी।

इस आदेश के बाद खंड में खलबली मची हुई है। बिलों की जांच भी इस बार नए तरीके से होगी। उदाहरण, जैसे किसी एक खंड में इन 6 माह के दौरान 200 बिजली बिलों में संशोधन या बिल सुधार किए गए होंगे। जांच टीम को खंड की तरफ से 40 बिलों को एक साथ देना होगा।

इसके अलावा टीम पूरे बिलों की गणना कर अपने मन से भी 5 प्रतिशत( 10) बिलों की जांच करेगी। इसी औचक बिल सुधार से खंड में लोग डरे सहमे हैं। निगम के सूत्रों ने बताया कि जिन बिलों में गड़बड़ी मिली, वहां एसडीओ और जेई के साथ लिपिक पर कार्रवाई तय है।

 

यूपीपीसीएल - फोटो : एक्स
इसके अलावा खंड या उपखंड के कैश काउंटर( संविदाकर्मी) पर काम करने वाले कर्मचारी भी रडार पर रहेंगे। इनपर भी कार्रवाई की जाएगी। शासन स्तर पर हुई समीक्षा में सामने आया था कि बिना अभियंताओं के सांठगांठ के बिल सुधार संभव ही नहीं हो सकता है। ऐसे में एक साथ बिल सुधार की जांच स्पेशल ऑडिट के द्वारा कराए जाने का फैसला किया गया है।

 ऐसे होता है बिल संशोधन का खेल
बिलों में सुधार को नाम पर बहुत पहले से खेल होते चले आ रहा है। जैसे, उपभोक्ता रोहित( काल्पनिक नाम) का मई महीने का बिजली बिल एक लाख रुपये आ गया। खंड के बाबू ने रोहित के फरवरी का बिजली बिल उठा लिया।

अब, उपभोक्ता का फरवरी में 2 हजार यूनिट की रीडिंग पर बिल बना था और उसपर एरियर 92 हजार रुपये थे। मई महीने में 4 हजार रीडिंग आ गई। तो ऐसे में फरवरी से मई के बीच रीडिंग के आधार पर बिल बनाकर उपभोक्ता की आईडी से एरियर को हटा देंगे।

ऐसे में सीधे उपभोक्ता का बिजली बिल 4 से 5 हजार रुपये के करीब आ जाएगा। समझौते के तहत अतिरिक्त सुविधा शुल्क बाबू रखेंगे और इसका हिस्सा जिम्मेदारों तक बंटता है। दूसरा, रीडिंग गड़बड़ी तो समझौते के तहत यूनिट का सत्यापन करवा लेते है। इसमें जेई की भूमिका खास होती है।

चेकों से भी की गई खूब गड़बड़ी
गोरखपुर मंडल में बिजली निगम के खंडों में बिजली बिल भुगतान के संबंध में भारी गड़बड़ी मिली थी। कई खंडों में उपभोक्ताओं के जमा किए चेक रिकॉर्ड में ही नहीं मिले थे। बिजली निगम के रोकड़ बही में उपभोक्ता और चेक का विवरण तक नहीं मिला।

इसकी जांच के लिए टीम गठित की गई। ये चेक वर्ष 2016 से 2020 के बीच के थे। लगभग सात करोड़ रुपये के इस गोलमाल की आशंका है। सबसे अधिक चेक गोरखपुर ग्रामीण खंड प्रथम के थे। ऐसे ही देवरिया, महाराजगंज और कुशीनगर मंडल में भी लंबित चेकों के मामले हैं।

अगर इनकी जांच हो जाए को कई मामले सामने आ सकते हैं। लेकिन, आपसी समझौते के तहत इस जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस जांच में बस निगम को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति का नुकसान हुआ और जिम्मेदार आज भी निर्दोष हैं।
 
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पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड - फोटो : एक्स
 महाराजगंज और हाटा की अलग चल रही स्पेशल ऑडिट
महाराजगंज और कुशीनगर में बिलों के सुधार को लेकर स्पेशल ऑडिट चल रही है। महाराजगंज में तो राजस्व खंड दफ्तर में आग गई थी। इसे लेकर वहां के एसडीओ ने भी अलग से शिकायत की थी। इसके अलावा कुशीनगर के हाटा में भी उपभोक्ताओं ने कुछ शिकायत की थी।

सूत्रों ने बताया कि वहां प्रायोजित शिकायत करवाई गई थी। हालांकि, वहां के दफ्तर में भी आग लगी थी। लेकिन, जांच आदेश आने के पहले ही शार्ट सर्किट से आग लगना बताया गया।

जांच हो तो सेवानिवृत्ति भी पड़ जाए संकट में
बिजली निगम के शहर और ग्रामीण खंडों की अगर अलग से जांच हो जाए तो कई अभियंताओं की सेवानिवृत्त भी संकट में पड़ सकती है। इसमें अभियंताओं ने एक ही खंड में दो आईडी बनाकर अलग-अलग बिलों में सुधार करवाया था।

इसके अलावा 2016 से 2021 के दौरान बड़ी संख्या में बिलों में गड़बड़ी और चेक में खेल हुआ था। इसकी जांच हो जाए तो इन अभियंताओं की सेवानिवृत्ति भी फंस सकती है। सरकार और बिजली निगम अगर नुकसान की भरपाई कराए तो राजस्व भी जमा हो सकता है।

निदेशक कॉमर्शियल यूपीपीसीएल,अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि  उपभोक्ता को गलत बिजली बिल न मिले, इसकी जांच भी टीम करेगी। आखिर क्यों इन्हें बिजली बिल गलत मिलते थे। इसमें सिस्मट की कमी है या खंड स्तर से कोई लापरवाही।

जांच के आधार पर अगर कहीं लापरवाही या कमी मिली तो विभागीय नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। अविलंब जांच शुरू करवा रिपोर्ट देनी होगी। निगम का धन सरकारी संपत्ति है। इसकी धांधली पर जिम्मेदारों को कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।

एक्सईएन सोमदत्त शर्मा ने बताया कि कारपोरेशन के नियमानुसार स्पेशल ऑडिट शुरू हो गई है। टीम ने जो रिकार्ड मांगे हैं, वो दे दिए गए हैं। बचे जो हैं वो भी दे दिए जाएंगे। टीम का पूरा सहयोग खंड दफ्तर की तरफ से किया जाएगा।
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