यह तो बानगी है। अचानक शीर्ष नेतृत्व की तरफ से काजल निषाद को मेयर का प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद से पार्टी के भीतर ही कई नेताओं व उनके समर्थकों में असंतोष व्याप्त हो गया है। हालांकि कुछ एक को छोड़कर ज्यादातर बहुत खुल कर प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। अलबत्ता फोन पर और अकेले में करीबियों से बातचीत में भड़ास निकाल रहे हैं।
दरअसल, पार्टी की तरफ से प्रभारी बनाए गए पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा और विधायक संग्राम सिंह यादव के नेतृत्व में स्क्रीनिंग कमेटी की हुई बैठक के बाद जिले से जो पांच नाम भेजे गए थे, उनमें ठाकुर, ब्राह्मण, कायस्थ नेताओं के नाम शामिल थे मगर काजल का नाम नहीं था। ऐसे में अचानक से उन्हें प्रत्याशी घोषित कर दिए जाने से सभी चौंक गए हैं। तो वहीं टिकट की रेस में शामिल नेताओं और उनके समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक कुछ नेताओं ने तो शीर्ष नेतृत्व की बुधवार को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान भी सामान्य वर्ग को नेता को मौका नहीं देने पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
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निषाद नेताओं की भी होगी परीक्षा
नगर निगम क्षेत्र में निषाद वोटरों की भी संख्या काफी अधिक है। इन वोटरों में भाजपा समर्थित निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद की पैठ बहुत अच्छी मानी जाती है। ऐसे में निषाद वोटरों में सेंधमारी कर समाजवादी पार्टी की मेयर प्रत्याशी कालज निषाद को वोट दिलाने में पार्टी के निषाद नेताओं की भी परीक्षा होगी। माना जा रहा है कि मेयर का नतीजा, आगामी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में प्रत्याशियों के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व के फैसले का हर कोई सम्मान करता है और पूरी निष्ठा, ईमानदारी से पार्टी प्रत्याशी का समर्थन कर रहा है। पार्टी के फैसले पर कोई भी नाराज नहीं है। यह सिर्फ अफवाह है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अपने हर कार्यकर्ता के हितों का ध्यान रखते हैं। काजल निषाद को भारी मतों से जीत दिलाने के लिए हर नेता, कार्यकर्ता जी-जान से जुट गया है। चुनाव में पार्टी, बड़े अंतर से जीत हासिल करेगी। हर कोई भाजपा की नीतियों से परेशान है और निकाय चुनाव में जवाब देने को तैयार है।