शौचालय के नाम पर पैसे निकाले, बने कागजों में
पिपराइच में शौचालय बनवाने के लिए पैसे तो निकाल लिए, लेकिन न शौचालय बने न लाभार्थियों को पैसे मिले। शिकायत के बाद मामले की जांच कराई गई तो पता चला कि राउतपार गांव में 321 शौचालय बनवाने थे, जिसमें से 92 कागजों में बने हैं। 29 निर्माणाधीन हैं, लेकिन पैसे हजम कर लिए गए।
जानकारी के अनुसार, राउतपार गांव के प्रधान संजय सिंह ने शौचालयों में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। इस पर एडीओ पंचायत की अध्यक्षता में जांच की गई। जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी हिमांशु ठाकुर ने बताया कि श्रमायुक्त, जिलाधिकारी सहित अन्य को विधिक कार्रवाई के लिए लिखा गया है। जांच में बताया गया है कि वर्ष 2010 से 2020 के बीच एक ही परिवार के ग्राम प्रधान, रोजगार सेवक और रोजगार सेवक की प्रधान पत्नी ने मिलकर 13 लाख रुपये निकाल लिए। इन लोगों ने लाभार्थियों का शौचालय भी नहीं बनवाया और रुपये भी नहीं दिए।
इसी तरह तीन पूर्व ग्राम पंचायत सचिवों ने भी अलग-अलग तारीखों में करीब छह लाख 30 हजार रुपये निकाल लिए। इन रुपयों को लाभार्थियों के खाते में नहीं भेजा गया, न शौचालय बनवाया गया। जांच में सामने आया कि गांव में बनने वाले 321 शौचालयों में से 92 कागजों में ही बनाए गए हैं। बीडीओ प्रीति वर्मा ने बताया कि मामला गंभीर है। मामले की जांच कराई जाएगी। वहीं, एडीओ पंचायत अवनेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि मामले की जानकारी जिलाधिकारी को दी गई है।
घूस लेने के अभियुक्त सहायक प्रबंधक को तीन साल की सजा
गोरखपुर घूस लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के जुर्म में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम तनु भटनागर ने कार्यालय अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम समाज कल्याण विभाग, आजमगढ़ के तत्कालीन सहायक प्रबंधक को तीन साल के कठोर कारावास एवं चार हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर दो माह का कारावास अलग से भुगतना होगा।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रमेश राम त्रिपाठी का कहना था कि शिकायतकर्ता कौशिल्या ने भ्रष्टाचार निवारण संगठन को प्रार्थनापत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि वह सरकारी छूट की योजना के तहत बीड़ी बनाने का कारखाना चलाना चाहती थीं। जिसके लिए उन्होंने यूनियन बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था।
उसी आवेदन पत्र को निगम के माध्यम से स्वीकृत करने के लिए अभियुक्त ने शिकायतकर्ता से 16 सौ रुपये घूस की मांग की थी। शिकायतकर्ता के प्रार्थनापत्र पर एक ट्रैप टीम का गठन किया गया और अभियुक्त को 18 मई 2006 को दिन में 12:35 बजे आजमगढ़ कार्यालय से घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा गया।
रेलवे: 54 ई-टिकट के साथ अवैध कारोबारी पकड़ा गया
रेलवे सुरक्षा बल और सीआईबी की संयुक्त टीम ने गोरखपुर स्टेशन के गेट नंबर छह के सामने बाबा टूर एंड ट्रेवल्स की दुकान में छापा मारकर ई-टिकट के अवैध कारोबारी को पकड़ा।
आईआरसीटीसी का एजेंट होने के बाद भी दुकान संचालक प्रतिबंधित साफ्टवेयर के माध्यम से व्यक्तिगत आईडी पर ई-टिकट बुक करता था। इसके बदले लोगों से 300 से 400 रुपये अधिक किराया वसूल रहा था। तलाशी में उसके पास से लगभग एक लाख रुपये कीमत के 54 ई-टिकट, एक लैपटॉप, दो मोबाइल और 10,360 रुपये नकद बरामद हुए हैं। टीम ने अनाधिकृत रूप से रेलवे का ई-टिकट बुक करने के आरोप में अंकुर उपाध्याय निवासी, भेड़ियागंज, थाना शाहपुर व स्थायी निवासी ग्राम डंडवार, थाना फरेंदा, महराजगंज के खिलाफ रेलवे एक्ट के तहत कार्रवाई की है। टीम में सीआईबी निरीक्षक दशरथ प्रसाद, लक्ष्मी शंकर यादव, रामबहादुर, विनोद कुमार, विद्यारतन, धीरज कुमार आदि शामिल रहे।