मामले की जांच के लिए लगाई गई कमेटियों ने 26 अगस्त को ही अपनी जांच रिपोर्ट सीडीओ इंद्रजीत सिंह को सौंप दी थी। बुधवार को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के पास भेजी गई। डीएम ने रिपोर्ट के अध्ययन के बाद संबंधित पर एफआईआर समेत अन्य विधिक कार्रवाई के लिए अपनी स्वीकृति दे दी जिसपर बृहस्पतिवार को संबंधित सचिवों और विक्रेताओं पर कार्रवाई के लिए संबंधित थानों को पत्र भेज दिया गया। शुक्रवार के इस मामले में मुकदमा दर्ज हो जाने की उम्मीद है।
इन साधन सहकारी समितियों के सचिवों पर हुई कार्रवाई
- साधन सहकारी समिति अरांव जगदीश गोला
- साधन सहकारी समिति केराडीह बेलघाट
- साधन सहकारी समिति बेलघाट
- साधन सहकारी समिति पीपरसंडी बेलघाट
- साधन सहकारी समिति धुरियाडीह
- एग्रोसेवा केंद्र, मदरिहा, गोला
- वन स्टॉप शॉप, डूडी चौराहा, सरदारनगर
- जय मां अंबे ट्रेडर्स, हरपुर लुहसी, पिपराइच
- आरके खाद भंडार, बलुआ, कैंपियरगंज
- सिंह खाद भंडार, सिसवा सोनबरसा, सहजनवां
सबसे ज्यादा खाद खरीदने वाले 20 लोगों की जांच कराई गई थी। डीएम के निर्देश पर पांच समितियों के सचिव एवं पांच निजी खाद विक्रेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई जा रही है। खाद विक्रेताओं के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए गए हैं। किसी ने भी खाद बिक्री में नियमों की अनदेखी या गड़बड़ी की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- अरविंद कुमार चौधरी, जिला कृषि अधिकारी एवं अधिसूचित प्राधिकारी उर्वरक, गोरखपुर
यूरिया खरीदने वाले टॉप 20 में से 11 बेलघाट के
शासन की तरफ से जो यूरिया खरीदने वाले टॉप 20 खरीदारों की सूची सौंपी गई थी उनमें 11 खरीददार अकेले बेलघाट विकास खंड के थे। इसके अलावा, चार सहजनवां, दो पिपराइच तथा एक-एक कैम्पियरगंज, सरदारनगर, खजनी से हैं।
जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि एक ही व्यक्ति को जरूरत से खाद बेचने की अनियमितता भी सबसे ज्यादा बेलघाट में ही हुई। बेलघाट के ही एक समिति के सचिव ने खुद के साथ ही परिवार के तीन सदस्यों को 60 टन यूरिया बेच दी तो एक ने खुद के साथ अपने एक करीबी किसान को नौ-नौ टन यूरिया बेच दी। पांच में से जिन चार समितियों के सचिवों पर गाज गिरी है, वे भी बेलघाट के ही हैं।
खाद को लेकर एक और मामले में जांच चल रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में एक अप्रैल से 31 मार्च तक बिना आधार कार्ड के काल्पनिक नामों पर 23.25 हजार क्विंटल यूरिया बेच दी गई। इन्हें 18 विक्रेताओं ने बेचा। केंद्र सरकार के निर्देश पर जांच शुरू करने के साथ ही सभी की बिक्री पर रोक लगाने के साथ ही उन्हें नोटिस दिया गया है।
21 अगस्त को ही जवाब देने का आखिरी दिन था मगर नौ ने ही जवाब दिया। बाकी ने मामला पिछले साल का होने का हवाला देते हुए जवाब देने के लिए और मौका मांगा था जिसपर उन्हें 30 अगस्त तक की और मोहलत दी गई है। इस मामले में भी कार्रवाई तय मानी जा रही है। आरोप है कि इन विक्रेताओं ने पीओएस मशीन में आधार की जगह दूसरे विकल्पों को भरने के साथ ही काल्पनिक नाम दर्ज किए हैं।