पूर्वांचल में छोटे राजनीतिक दलों की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन, गोरखपुर शहर विधानसभा की बात करें तो यहां छोटे राजनीति दल कभी, कोई बड़ा करिश्मा नहीं दिखा पाए हैं। आंकडे़ गवाह हैं कि पिछले दो चुनावों में पीस पार्टी को छोड़कर छोटे दलों के प्रत्याशी एक हजार वोट भी नहीं पा सके हैं।
वर्ष 2017 में नौ छोटे राजनीति दलों के प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई थी। जिसमें सिर्फ पीस पार्टी के प्रत्याशी अरुण कुमार श्रीवास्तव को 2,252 मत मिले थे। कुल 24 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में सातवें स्थान पर नोटा था। इसी प्रकार वर्ष 2012 में भी छोटे राजनीतिक दल, मतदाताओं की पसंद नहीं बन सके। कुल 13 छोटे दलों ने प्रत्याशी उतारे थे। सबसे ज्यादा 2,187 मत पीस पार्टी को ही मिले थे। अन्य राजनीतिक दलों के प्रत्याशी एक हजार मत भी नहीं पा सके थे।
दो चुनावों में 22 छोटे दलों ने आजमाई किस्मत
शहर विधानसभा क्षेत्र में छोटे राजनीतिक दलों ने ज्यादा प्रत्याशी उतारे हैं। वर्ष 2012 और 2017 में 22 दलों के प्रत्याशियों ने किस्मत आजमाई है, लेकिन मतदाताओं ने उन पर भरोसा नहीं जताया। किसी भी प्रत्याशी की जमानत नहीं बची।