मुठभेड़ में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसओ अनिल कुमार पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव और सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, परशुराम गुप्ता व विश्वनाथ यादव शहीद हो गए। पुलिस की अन्य टीमें जब तक पहुंचीं डकैत अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। अगले दिन डीजीपी समेत तमाम पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और रणनीति बनाकर गंडक नदी के दियारा में रहने वाले जंगल डकैतों का सफाया शुरू हुआ था।
जिले में जन्माष्टमी व डोल का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मेला खत्म होने के बाद पुलिस लाइन में भी कार्यक्रम होता था। 30 अगस्त 1994 की रात में भी पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था जिसमें जिले भर के पुलिसकर्मी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान सूचना मिलने पर पुलिस कर्मी उत्सव छोड़कर मुठभेड़ करने गए थे। इस मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस कर्मियों की याद में कुशीनगर की पुलिस लाइन में अब भी जन्माष्टमी का उत्सव नहीं मनाया जाता है।
कानपुर कांड के बाद बढ़ाई गई निगरानी
कोरोना संक्रमण के चलते 178 कैदी इस वक्त अंतरिम जमानत पर हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई हिस्ट्रीशीटर भी हैं। कानपुर की घटना के बाद कुशीनगर पुलिस ने भी थानावार इनकी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। एसपी विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि गिरोहबंद अपराधियों के खिलाफ पुलिस पहले से ही अभियान चला रही है। कानपुर की घटना के बाद सभी थानेदारों को अपने क्षेत्र में जेल से छूटकर आए, जमानत पर चल रहे तथा वांछित अपराधियों की निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।