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यूपी के इस जिले में भी 26 साल पहले मुठभेड़ में शहीद हुए थे छह पुलिस कर्मी, इनकी याद में नहीं मनाया जाता ये त्यौहार

Sat, 04 Jul 2020 08:40 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर।

सार

  • 30 अगस्त 1994 को पंचरुखिया घाट पर बांसी नदी में हुई थी जंगल डकैतों से मुठभेड़
  • मुठभेड़ में एसओ तरयासुजान अनिल पांडेय समेत छह पुलिसकर्मी हुए थे शहीद
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शहीद पुलिस कर्मियों की याद में बनाया गया प्रवेश द्वार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कानपुर की घटना ने कुशीनगर जिले में 26 साल पहले जंगल डकैतों से हुई मुठभेड़ में एसओ समेत छह पुलिसकर्मियों की शहादत फिर ताजा हो गई। पडरौना कोतवाली का गेट आज भी दुर्दांत अपराधियों के लिए खौफ का पर्याय रहे एसओ अनिल पांडेय समेत शहीद पुलिस कर्मियों की याद दिलाता है। इन शहीदों की याद में आज भी जिले की पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का पर्व नहीं मनाया जाता है।

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नब्बे के दशक में बिहार से सटे गंडक नदी के किनारे का इलाका जंगल डकैतों की वजह से चर्चा में रहता था। अपहरण, लूट, हत्या जैसी वारदातों को रोकने के लिए शासन ने सीमावर्ती क्षेत्र में हनुमानगंज, जटहां बाजार व बरवापट्टी थाना खोला। इसी दौरान सब इंस्पेक्टर अनिल कुमार पांडेय की जिले में तैनाती हुई। मुठभेड़ में माहिर अनिल कुमार पांडेय ने गंडक के दियारा क्षेत्र में समानांतर सरकार चलाने वाले जंगल डकैतों को चुन-चुनकर मारना शुरू किया।

13 मई 1994 को देवरिया से अलग होकर कुशीनगर जिला अस्तित्व में आया तो अनिल पांडेय को बिहार बार्डर से सटे तरयासुजान थाने पर तैनाती मिली। 30 अगस्त 1994 की रात में खबर मिली कि कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया घाट के दूसरी तरफ बांसी नदी के किनारे डकैत मौजूद हैं। एसपी ने एसओ अनिल कुमार पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को भेज दिया। परंतु पुलिस टीम के आने की भनक डकैतों को लग गई।

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पुलिस लाइन में नहीं मनाई जाती जन्माष्टमी

मुठभेड़ में एनकाउंटर स्पेशलिस्ट एसओ अनिल कुमार पांडेय, एसआई राजेंद्र यादव और सिपाही नागेंद्र पांडेय, खेदन सिंह, परशुराम गुप्ता व विश्वनाथ यादव शहीद हो गए। पुलिस की अन्य टीमें जब तक पहुंचीं डकैत अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले थे। अगले दिन डीजीपी समेत तमाम पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और रणनीति बनाकर गंडक नदी के दियारा में रहने वाले जंगल डकैतों का सफाया शुरू हुआ था।

जिले में जन्माष्टमी व डोल का मेला बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मेला खत्म होने के बाद पुलिस लाइन में भी कार्यक्रम होता था। 30 अगस्त 1994 की रात में भी पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था जिसमें जिले भर के पुलिसकर्मी मौजूद थे। इसी कार्यक्रम के दौरान सूचना मिलने पर पुलिस कर्मी उत्सव छोड़कर मुठभेड़ करने गए थे। इस मुठभेड़ में शहीद हुए पुलिस कर्मियों की याद में कुशीनगर की पुलिस लाइन में अब भी जन्माष्टमी का उत्सव नहीं मनाया जाता है।

कानपुर कांड के बाद बढ़ाई गई निगरानी
कोरोना संक्रमण के चलते 178 कैदी इस वक्त अंतरिम जमानत पर हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई हिस्ट्रीशीटर भी हैं। कानपुर की घटना के बाद कुशीनगर पुलिस ने भी थानावार इनकी निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया है। एसपी विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि गिरोहबंद अपराधियों के खिलाफ पुलिस पहले से ही अभियान चला रही है। कानपुर की घटना के बाद सभी थानेदारों को अपने क्षेत्र में जेल से छूटकर आए, जमानत पर चल रहे तथा वांछित अपराधियों की निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।
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