बच्चों और गर्भवती का टीकाकरण भी प्रभावित हुआ है। महिला अस्पताल में कोविड के बीच भी टीकाकरण होता रहा है। हालांकि टीके लगवाने वालों की संख्या बेहद कम हो गई है। वहीं, पहली लहर में एक माह के लिए टीकाकरण बंद हुआ था। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि टीकाकरण में एक दो सप्ताह या फिर एक माह की देरी से ज्यादा दिक्कत नहीं होती है लेकिन टीकाकरण बेहद जरूरी है।
पहले 140 से 150 बच्चों को लगता था टीका
कोविड महामारी से पहले महिला अस्पताल में प्रतिदिन 140 से 150 बच्चों को टीका लगता था। लेकिन जब से दूसरी लहर आई है तब से यह संख्या सिमटकर 15 से 20 हो गई है। बताया जाता है कि अभिभावक खुद ही बच्चों को टीकाकरण कराने नहीं आ रहे हैं।
बच्चों के लिए ये टीके बेहद जरूरी
- जन्म के समय- बीसीजी, पोलियो और हेपेटाइटिस-बी
- जन्म से छह सप्ताह पर- पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1, पीसीवी-1
- जन्म से 10 सप्ताह पर- पोलियो-2, रोटा वायरस-2, पेंटोवैलेंट-2
- जन्म से 14 सप्ताह पर- पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3, पीसीवी-2
- नौ से 12 महीने पर- मीजेल्स-रुबैला-1, पीसीवी-बूस्टर डोज और जपानी इंसेफेलाइटिस-1
- 14 से 24 महीने पर- पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रुबैला-2, डीपीटी बूस्टर-1 और जापानी इंसेफेलाइटिस-2
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने कहा कि बच्चों का टीकाकरण अभियान पूरी तरह से चलता रहा है। इसे एक भी दिन बंद नहीं किया गया है। पोलियो ड्रॉप लोग सीएचसी, पीएचसी समेत महिला अस्पताल में लेकर जाकर अपने बच्चों को पिला सकते हैं। डोर-टू-डोर अभियान कोविड की वजह से बंद है। इसे जल्द ही शुरू किया जाएगा।