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यूपी: 13 साल पहले दहेज के लिए मां-बेटे की हुई थी मौत, अब सभी आरोपी बरी

Fri, 26 Feb 2021 05:51 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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देवरिया जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के तेतरिया गांव में 13 वर्ष पूर्व दहेज के लिए ससुरालियों ने मां व मासूम को घर में जलाकर हत्या कर दिया। इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई के उपरांत जिला जज रविनाथ की अदालत ने सभी छह आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

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जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश कुमार मिश्र के अनुसार, वादी जयराम पांडेय निवासी ग्राम फुलवरिया पांडेय, थाना बरहज ने मदनपुर थाने में दी गई तहरीर में कहा कि उनके भतीजी गिरजा देवी की शादी अप्रैल 2001 में मदनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम तेतरिया निवासी राजेश मिश्र से हुई थी। दो वर्ष बाद वर्ष 2003 में उसका गवना हुआ।

शादी में मार्शल गाड़ी एवं एक लाख पचासी हजार नकद तथा दो लाख रुपये का कीमती सामान दिया गया था। गवना के बाद गिरजा ससुराल पहुंची। इसके बाद ससुराल के लोग एक लाख रुपये की मांग और करने लगे। इसी बीच वह गर्भवती हो गई, जब बच्चा होने वाला था तो ससुरालियों ने उसे मायके भिजवा दिया, जहां उसे लड़का पैदा हुआ।
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कई बार हुआ था समझौता

कुछ दिन बाद ससुरालियों ने उसे बुला लिया। इसके बाद उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा और कमरे में बंद कर दिया गया। साथ ही उसे भोजन नहीं दिया जाता था। जयराम का भतीजा विष्णु रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने पहुंचा तो गिरजा ने बताया कि उसे कमरे में बंद कर रखा जा रहा है। जिस पर पुलिस की मदद से बहन को बाहर निकलवाया।

इसके बाद पंचायत हुई और ससुराली पुन: उसे वापस ले गए। 14 नवंबर 2007 को टेलीफोन पर सूचना मिली कि गिरजा व उसके बच्चे को कमरे में बंद कर ससुराल के लोग जला दिए हैं। खबर मिलने के बाद मायका पक्ष के लोग पहुंचे और उसे जिला अस्पताल देवरिया ले गए, जहां गिरजा ने मृत्यु कालिक बयान दर्ज कराया।

इसके बाद गिरजा व उसके बच्चे सूरज की मौत हो गई। इस मामले में मदनपुर थाना में दस लोगों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने विवेचना के दौरान चार लोगों को निकाला दिया, जबकि छह लोगों राजेश मिश्र, शारदा प्रसाद मिश्र, रामप्रवेश मिश्र, आरती देवी, दुर्गावती देवी, विंदा देवी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ।

मामला प्रथम अपर जिला जज के न्यायालय में चल रहा था जिसमें आरोपियों ने पांच फरवरी 2021 को अंतरण प्रार्थना पत्र दिया गया। छह फरवरी को जिला जज ने अपने न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू की। शुक्रवार को सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।   
 
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