कुछ दिन बाद ससुरालियों ने उसे बुला लिया। इसके बाद उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा और कमरे में बंद कर दिया गया। साथ ही उसे भोजन नहीं दिया जाता था। जयराम का भतीजा विष्णु रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने पहुंचा तो गिरजा ने बताया कि उसे कमरे में बंद कर रखा जा रहा है। जिस पर पुलिस की मदद से बहन को बाहर निकलवाया।
इसके बाद पंचायत हुई और ससुराली पुन: उसे वापस ले गए। 14 नवंबर 2007 को टेलीफोन पर सूचना मिली कि गिरजा व उसके बच्चे को कमरे में बंद कर ससुराल के लोग जला दिए हैं। खबर मिलने के बाद मायका पक्ष के लोग पहुंचे और उसे जिला अस्पताल देवरिया ले गए, जहां गिरजा ने मृत्यु कालिक बयान दर्ज कराया।
इसके बाद गिरजा व उसके बच्चे सूरज की मौत हो गई। इस मामले में मदनपुर थाना में दस लोगों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने विवेचना के दौरान चार लोगों को निकाला दिया, जबकि छह लोगों राजेश मिश्र, शारदा प्रसाद मिश्र, रामप्रवेश मिश्र, आरती देवी, दुर्गावती देवी, विंदा देवी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल हुआ।
मामला प्रथम अपर जिला जज के न्यायालय में चल रहा था जिसमें आरोपियों ने पांच फरवरी 2021 को अंतरण प्रार्थना पत्र दिया गया। छह फरवरी को जिला जज ने अपने न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू की। शुक्रवार को सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।