गोरखपुर। गुलरिहा क्षेत्र के रजई चौराहे पर प्रतिमा विसर्जन के दौरान करंट लगने से तीन लोगों की मौत के मामले में बिजली निगम की शुरुआती जांच में शटडाउन और विसर्जन रूट की निगरानी में लापरवाही के संकेत मिले हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बिजली आपूर्ति बंद कराने के साथ ही विसर्जन के रास्ते पर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी भी तय थी। इसके लिए तीन संविदा लाइनमैन समेत पांच अधिकारियों, कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसके बावजूद हादसा होने से ड्यूटी की निगरानी और बिजली आपूर्ति बंद कराने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, अभी जांच पूरी नहीं हुई है और टीम ने अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। बिजली निगम ने हादसे के बाद जेई निकेतन गुप्ता को निलंबित कर दिया था। वहीं, संविदा कर्मी अजय कुमार मौर्य, बृजेश और गंगा निषाद को बर्खास्त कर दिया गया था। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ड्यूटी लगाए जाने के बावजूद बिजली आपूर्ति बंद कराने और विसर्जन रूट की निगरानी में कहां चूक हुई।
क्षेत्र में एसडीओ मोहद्दीपुर गाजी खान की भी जिम्मेदारी थी। हादसे के समय उनकी मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, रजई चौराहे के पास रामानंद के घर के समीप बिजली का तार नीचे लटक रहा था। विसर्जन के दौरान उसे ऊपर करने के प्रयास में लोहे का पाइप तार से छू गया, जिससे हादसा हुआ।
मुख्य अभियंता वितरण लोकेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किस स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है।