12 जुलाई 2022 को गैंगस्टर के मुकदमे में तारीख थी। इस दौरान पूर्व विधायक राजन तिवारी ने अधिवक्ता के जरिए गैर जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के स्थगन की मांग की थी। यह बताया गया था कि राजन तिवारी के 1999 से 2014 तक जेल में रहने के दौरान जारी गैर जमानती वारंट की जानकारी नहीं हो पाई। यही नहीं जिन दो मुकदमों को गैंगस्टर के लिए आधार बनाया गया है उसमें से एक में दोष मुक्त होने तथा एक का विचारण चलने की भी कोर्ट को जानकारी दी गई थी। इस मामले में कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी और कोर्ट ने एनबीडब्ल्यू बरकरार रखा था।
गोरखपुर में जन्म और यहीं से की थी अपराध की शुरुआत
मूल रूप से गोरखपुर के सोहगौरा गांव निवासी राजन तिवारी की प्रारंभिक शिक्षा भी इसी जिले में हुई। युवा अवस्था में राजन तिवारी ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। 90 के दशक के माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के संपर्क में आने के बाद राजन तिवारी का नाम कई अपराधों में सामने आया। श्रीप्रकाश शुक्ला के साथ जुड़े मामलों में भी राजन तिवारी शामिल रहा, जिससे उसकी गिनती बाहुबलियों में होने लगी।
वीरेंद्र शाही पर हमले का आरोपी भी बना था राजन
यूपी के महराजगंज की लक्ष्मीपुर विधानसभा सीट से विधायक रहे वीरेंद्र प्रताप शाही पर हमले में भी राजन तिवारी का नाम आया था। इस घटना में माफिया डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला और राजन तिवारी समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। इस आपराधिक कृत्य की वजह से राजन तिवारी यूपी पुलिस के लिए वांटेड बन गया था। यही वो वक्त था जब राजन तिवारी ने बिहार का रुख किया और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए राजनीतिक जमीन तलाशने लगा। हालांकि, वीरेंद्र प्रताप शाही पर हमले के मामले में राजन तिवारी 2014 में बरी हो चुका है।