ठगी का शिकार हुए जयगोविंद और गयादीन मौर्या के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी के एजेंटों ने बताया कि 50 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इस लालच में आम लोग जुड़ने लगे। रुपये कमाने के लालच में सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर लोग फंसे। फिर जब कंपनी का नाम चल निकला तो बड़े निवेशकों को इससे जोड़ा गया। कंपनी ने नियम बना दिया कि पांच हजार रुपये से कम निवेश नहीं होगा। इस तरह से एजेंटों के माध्यम से करोड़ों रुपये एकत्र कर लिए।
आरोपियों की जयपुर से गिरफ्तारी के बाद हुआ जालसाजी का खुलासा
साल भर तक कंपनी से जुड़े एजेंटों ने पूरी लगन के साथ काम किया। फिर कार्यालय में आरोपियों की आवाजाही कम होने लगी। चार नवंबर 2017 को कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोरंजन राय, निदेशक हरि सिंह, विनय सिंह, राजकुमार, रघु रेठी को जयपुर की स्पेशल विंग ने दबोच लिया।
25 जुलाई 2018 को एजेंटों को पता चल गया कि कंपनी पूरी तरह से फ्राड थी और अब वह फरार हो चुकी है। एजेंट बड़ी संख्या में कार्यालय पर पहुंचे तो वहां पर ताला लटका मिला। फिर टाॅवर के मैनेजर से पता चला कि कंपनी का दो महीने का किराए एडवांस जमा है। इसके बाद एजेंट अक्सर पहुंचते थे, लेकिन इसी बीच एक रात कंपनी के कुछ लोग आए और बिना किसी को भनक लगे ही अपना सामान लेकर फरार हो गए। इसके बाद एजेंटाें और निवेशकों ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया।
2018 में कैंट, 2019 में कोतवाली में दर्ज हुआ केस
चार अगस्त 2019 को कैंट पुलिस ने एडीजी के आदेश पर संजय सिंह की तहरीर पर छह आरोपियों पर केस दर्ज किया था। इसके बाद फिर न्यायालय के आदेश धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी की तहरीर पर 13 सितंबर 2019 को कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपियों के खिलाफ कोलकाता के खोजुरी थाने में क्राइम नंबर 47/17 जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज है।