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फर्जी चिटफंड कंपनी पिनकॉन मामला: युवाओं को सपने जिंदगी बदलने के दिखाए... बना गए कंगाल

Fri, 14 Apr 2023 11:53 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।

सार

ठगी का शिकार हुए जयगोविंद और गयादीन मौर्या के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी के एजेंटों ने बताया कि 50 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इस लालच में आम लोग जुड़ने लगे। रुपये कमाने के लालच में सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर लोग फंसे। फिर जब कंपनी का नाम चल निकला तो बड़े निवेशकों को इससे जोड़ा गया।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media
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विस्तार
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दो फरवरी 2016 का दिन वह दिन साबित हुआ जो शहर के कई युवाओं को जिंदगी बदलने के सपने दिखाकर कंगाल कर गया। इसी दिन फर्जी चिटफंड कंपनी पिनकॉन ने शहर के प्रमुख चौराहों पर एजेंट बनकर मोटी कमाई करने के पोस्टर लगाए। संपर्क के लिए तीन नंबर दिए गए और फिर युवा बेरोजगारों की भीड़ लग गई।

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जालसाजों ने शहर के बैंक रोड स्थित एडी टावर में ऑफिस खोला। यहां बाकायदा युवाओं का इंटरव्यू के बाद एजेंट के तौर पर चयन हुआ। टाई-बेल्ट पहने 152 युवाओं को लगा कि अब उनकी जिंदगी बदलने वाली है। लेकिन, उन्हें नहीं पता था कि वे गोरखपुर के इतिहास में हुए सबसे बड़े फर्जीवाड़ों में से एक की कड़ी बनने वाले हैं।

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1600 करोड़ का फर्जीवाड़ा करने वाली पिनकॉन ग्रुप के साथ बेहतर भविष्य का सपना देखने वाले हजारों लोग जुड़ते चले गए। कंपनी के साथ बतौर एजेंट जुड़े 152 युवा अपने-अपने क्षेत्र में लोगों को कंपनी के रेडिनेबुल प्रिफरेंस शेयर, ना कन्वरटेबुल डेवेंचर, एएसके फाइनेंसियेबुल डिबेचर, ग्रीनेच फुट प्रोडेक्ट, बंगाल पिनकाॅन हाउसिंग इन्फ्रा जैसे सात उपक्रम बताकर निवेश कराने में जुट गए। निवेश करने वाले को बताया जाता था कि निवेश किए गए रुपयों पर बैंक से ज्यादा और जल्दी ब्याज मिलेगा।

कंपनी के झांसे में आकर एजेंट बने धर्मेंद्र त्रिपाठी व संतोष कुमार पांडेय बताते हैं, चिटफंड कंपनी ने भरोसा दिलाने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन नंबर भी जारी कर दिया था। एजेंटों को बताया गया कि पिनकॉन ग्रुप आरबीआई मुंबई से संबद्ध है। जिसकी पंजीकरण संख्या आईएनबी 031488431 और आईएनआर 000000353 है। इसके बाद कंपनी की फर्जी वेबसाइट भी बनाकर जारी कर दी गई जिसे देखकर युवा फंसते चले गए और ग्राहकों का पैसा डूब गया।

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50 रुपये के निवेश से कराई शुरुआत

ठगी का शिकार हुए जयगोविंद और गयादीन मौर्या के मुताबिक, शुरुआत में कंपनी के एजेंटों ने बताया कि 50 रुपये से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इस लालच में आम लोग जुड़ने लगे। रुपये कमाने के लालच में सबसे पहले आर्थिक रूप से कमजोर लोग फंसे। फिर जब कंपनी का नाम चल निकला तो बड़े निवेशकों को इससे जोड़ा गया। कंपनी ने नियम बना दिया कि पांच हजार रुपये से कम निवेश नहीं होगा। इस तरह से एजेंटों के माध्यम से करोड़ों रुपये एकत्र कर लिए।

आरोपियों की जयपुर से गिरफ्तारी के बाद हुआ जालसाजी का खुलासा
साल भर तक कंपनी से जुड़े एजेंटों ने पूरी लगन के साथ काम किया। फिर कार्यालय में आरोपियों की आवाजाही कम होने लगी। चार नवंबर 2017 को कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोरंजन राय, निदेशक हरि सिंह, विनय सिंह, राजकुमार, रघु रेठी को जयपुर की स्पेशल विंग ने दबोच लिया।



25 जुलाई 2018 को एजेंटों को पता चल गया कि कंपनी पूरी तरह से फ्राड थी और अब वह फरार हो चुकी है। एजेंट बड़ी संख्या में कार्यालय पर पहुंचे तो वहां पर ताला लटका मिला। फिर टाॅवर के मैनेजर से पता चला कि कंपनी का दो महीने का किराए एडवांस जमा है। इसके बाद एजेंट अक्सर पहुंचते थे, लेकिन इसी बीच एक रात कंपनी के कुछ लोग आए और बिना किसी को भनक लगे ही अपना सामान लेकर फरार हो गए। इसके बाद एजेंटाें और निवेशकों ने आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया।

2018 में कैंट, 2019 में कोतवाली में दर्ज हुआ केस
चार अगस्त 2019 को कैंट पुलिस ने एडीजी के आदेश पर संजय सिंह की तहरीर पर छह आरोपियों पर केस दर्ज किया था। इसके बाद फिर न्यायालय के आदेश धर्मेंद्र कुमार त्रिपाठी की तहरीर पर 13 सितंबर 2019 को कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपियों के खिलाफ कोलकाता के खोजुरी थाने में क्राइम नंबर 47/17 जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज है।

 
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