गोरखपुर। असलहा तस्करी के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की पुलिस की कोशिश पुलिस बल की कमी के कारण अटक गई है। जेल में बंद तीन असलहा तस्करों को पुलिस रिमांड पर लेने के लिए विवेचक की ओर से न्यायालय में अर्जी दी गई थी, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपितों को पेशी पर नहीं लाया जा सका।
तीनों आरोपी देवरिया, संतकबीरनगर और गोरखपुर की जिला जेलों में बंद हैं। अब मंगलवार को विवेचक दोबारा न्यायालय में अर्जी देकर रिमांड की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। 14 सितंबर को कैंट क्षेत्र में श्रेयांश यादव और उसके साथियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने असलहा तस्करी के नेटवर्क की जांच तेज कर दी थी।
आरोपियों से पूछताछ के दौरान तीन अन्य असलहा तस्करों के बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने इन तीनों आरोपितों से पूछताछ कर नेटवर्क के संपर्कों और असलहा तस्करी में उनकी भूमिका का पता लगाने की तैयारी की। तीनों आरोपियों से पूछताछ के लिए विवेचक ने उन्हें पुलिस रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में अर्जी दी थी।
रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के लिए संबंधित जेलों से आरोपियों को गोरखपुर लाकर न्यायालय में पेश करना जरूरी था। हालांकि, पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण आरोपियों को पेश नहीं किया जा सका और रिमांड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। असलहों की आपूर्ति और नेटवर्क के संपर्क खंगालेगी पुलिस
पुलिस अब मंगलवार को न्यायालय में दोबारा अर्जी देकर तीनों आरोपियों की रिमांड हासिल करने का प्रयास करेगी।
पुलिस की मंशा आरोपियों से पूछताछ कर असलहों की आपूर्ति के स्रोत, तस्करी के नेटवर्क में उनकी भूमिका और उनसे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की है। रिमांड मिलने के बाद पूछताछ में नेटवर्क की अन्य कड़ियों के सामने आने की उम्मीद है।