सोमवार को मुंबई से ट्रेन से शिवप्रसाद बस्ती रेलवे स्टेशन और फिर वहां निजी साधन से घर पहुंचे तो बेटी प्रीतांजलि, बेटा मृत्युंजय और युवराज उनसे लिपट गए। सभी का गला रुंधा था और आंखों से झर-झर आंसू बह रहे थे। पत्नी पुष्पावती की आंखों में आंसू थे, लेकिन चेहरे पर चमक थी, कि इतने बड़े तूफान को झलने के बाद भी उनके पति सुरक्षित हैं। परिवार और गांव के लोगों से मिलने के बाद वह गांव के मंदिर पर परिवार के साथ मत्था टेकने भी गए।
273 थे सवार, 66 की हुई थी मौत
शिवप्रसाद ने बताया कि बार्ज पी 305 जहाज पर कुल 273 लोग लोग सवार थे। तूफान में फंसने के बाद इसमें 66 की मौत हो चुकी है। बताते हैं कि जब वह समुद्र में गिरे तो लहरों के साथ बहने लगे। इस दौरान लहरें उन्हें 15 से 18 फीट तक उछाल रही थीं। बचाए जाने तक अपने जहाज से वह करीब 35 किलोमीटर तक समुद्र में बहते चले गए थे। उनके साथ करीब सौ लोग समुद्र में कूदे थे, जिनमें से कई लोग लापता हो गए थे। वह खुशकिस्मत रहे कि बच गए।
लाइफ जैकेट की लाइट ने बचाया
शिवप्रसाद बताते हैं कि समुद्री तूफान में फंसने पर उन्हें क्या करना होता है, इसके बारे में विस्तार से ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें लाइफ जैकेट का इस्तेमाल सबसे अहम होता है। इसके अलावा सीटी बजाने को भी कहा जाता है, ताकि उनकी आवाज को दूर तक सुुना जा सके। समुद्र में लहरों पर हिचकोले खाने के दौरान हिम्मत करके बीच-बीच में सीटी भी बजाते रहे, ताकि बचाव दल को उनका पता चल सके। शाम ढलने के बाद रात में जैकेट में लगी लाइट जली तो नौसेना के जवानों को उनके बारे में पता चला।