प्रसपा के मंडलीय सम्मेलन में आए शिवपाल यादव जितना भाजपा पर हमलावर दिखे, उतना ही सपा पर। हालांकि मौका मिला तो शर्तों के साथ सपा संग गठबंधन करने को भी तैयार दिखे। सर्किट हाउस में शिवपाल पार्टी कार्यकर्ताओं से मिले, कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी किंग मेकर की भूमिका में रहेगी। अभी से जुट जाएं। अमर उजाला ने सपा और भाजपा सरकार में अंतर पूछा तो बिफर पड़े।
बोले- आप देखिए तो, अंतर साफ नजर आएगा। हमारी सरकार में जितना ताकतवर सपा का जिलाध्यक्ष होता था, उतना भाजपा सरकार के उप मुख्यमंत्री नहीं हैं। अफसर किसी का सुनने को तैयार नहीं हैं। इसी का नतीजा रहा कि बड़ी संख्या में भाजपा विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। तहसील, थाने लूट के अड्डे बन गए हैं। शिवपाल यादव से संवाददाता टीपी शाही ने विशेष बातचीत की।
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पेश हैं अंश-
सवाल: सपा में प्रसपा के विलय की चर्चा है। आप क्या कहेंगे?
जवाब: बेकार की बात है। सपा में प्रसपा के विलय का कोई सवाल ही नहीं है। वैसे वह भाजपा को हराने के लिए समान विचारधारा वाली पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं। सपा यदि चाहेगी तो गठबंधन हो सकता है। वह भी हमारी शर्तों पर सपा के नहीं ।
सवाल: सपा के जब इतने नजदीक हैं तो पार्टी क्यों छोड़ी?
जवाब: परिस्थितियां ऐसी बनी कि पार्टी छोड़नी पड़ी। जिस समाजवादी पार्टी को हम और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने खून पसीने से खड़ा किया, उसमें कुछ ऐसे लोग आ गए जिन लोगों ने नेताजी और मेरा अपमान करना शुरू कर दिया। नेताजी का अपमान बर्दाश्त नही कर सकते हैं। इस नाते पार्टी छोड़ी, नेताजी का आशीर्वाद अब भी हमारे साथ है।
सवाल : सपा नेताओं का आरोप है कि आप मुख्यमंत्री से मिले हैं, क्या कहेंगे?
जवाब: मुख्यमंत्री किसी दल का नहीं पूरे आम अवाम का होता है। हम समाजवादी हैं और जनता के लिए कार्य करते हैं। जनता की समस्या को लेकर यदि सीएम से कोई मिलता है तो उस पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
सवाल: भाजपा सरकार के कामकाज को कैसे देखते हैं?
जवाब : इतनी कमजोर सरकार हमने कभी नहीं देखी। हमारी बात को टालने की हिम्मत किसी अधिकारी में नहीं थी। भाजपा के मंत्रियों की कोई सुनने वाला नही है। अब के उप मुख्यमंत्री से अधिक हैसियत हमारे जिलाध्यक्ष की हुआ करती थी। इस सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। तहसील, थाने लूट का अड्डा बन गए हैं।
सवाल : भ्रष्टाचार के आरोप आप की सरकार पर भी लगे थे?
जवाब: आरोप किसी पर कोई लगा सकता है। इस सरकार के विधायकों का थानेदार नहीं सुनता। अपनी ही सरकार के खिलाफ 150 विधायक सदन के अंदर धरने पर बैठ गए। यह अपने तरह की अलग ही घटना है। ऐसा कभी नहीं हुआ था। जब विधायकों की बात नहीं सुनी जाएगी तो विकास किस तरह से होगा, समझा जा सकता है।
सवाल: सम्मेलन के दौरान अयोध्या से आए राम लक्ष्मण का आप ने तिलक लगाकर स्वागत किया, क्या भाजपा के रास्ते पर चल पड़े हैं?
जवाब : भाजपा के लिए राम का कोई मतलब न था न है। राम मंदिर चुनावी मुद्दा था। भाजपा कभी भी राम मंदिर नहीं बनवाना चाह रही थी। यह तो सुप्रीमकोर्ट का फैसला आ गया, जिसके कारण राम मंदिर का निर्माण हो रहा है।