गोरखपुर। सूर्यकुंड धाम में चल रहे 30 दिवसीय श्रावण महोत्सव के 20वें दिन मंगलवार को शिव विवाह प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। कथावाचक पं. अवनीश शुक्ला ने कहा कि शिव बरात संसार में समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण है। शिव समरसता के देवता हैं। उनकी बरात में देवता, असुर, भूत-पिशाच, बेताल, यक्ष, गंधर्व और विभिन्न जीव-जंतु तक भेदभाव भुलाकर एक साथ आनंद में झूम रहे थे। इससे पहले ब्रह्म मुहूर्त में पूजा-अर्चना की गई।
उन्होंने बताया कि शिव नंदी पर सवार होकर गले में नाग की माला धारण किए बारात लेकर माता पार्वती के द्वार पहुंचे। शिव के इस विचित्र रूप को देखकर माता मैना बेहोश हो गईं। माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने अपना दिव्य चंद्रमौली रूप धारण किया। विवाह में पार्वती की वंश परंपरा का बखान हुआ लेकिन शिव मौन रहे। तब देवर्षि नारद ने बताया कि शिव स्वयंभू हैं। उनका न कोई माता-पिता है और न कोई वंश या परिवार। शिव की पहली अभिव्यक्ति ध्वनि के रूप में हुई। कथा सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर परमात्मा राम त्रिपाठी, सुभाष मणि, पूनम त्रिपाठी, उमेश चंद, विनोद पांडेय, वीना श्रीवास्तव, अजय राजभर, मदन राजभर आदि मौजूद रहे।