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Gorakhpur News: विशेष टीईटी से बाहर हुए शिक्षामित्र, शिक्षक बनने की उम्मीद को लगा झटका

Sat, 03 Oct 2026 02:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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- हाईकोर्ट के फैसले से जिले के 2855 शिक्षामित्रों में निराशा, 26 साल की सेवा के बाद भी नही बन सकेंगे शिक्षक
- कम मानदेय और बढ़ती उम्र के बीच परिवार चलाना मुश्किल, समायोजन रद्द होने के बाद अब विशेष टीईटी से भी बाहर



गोरखपुर। 26 साल तक गांव के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने के बाद भी शिक्षक बनने की उम्मीद लगाए बैठे शिक्षामित्रों को एक बार फिर झटका लगा है। विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) में शामिल करने की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद जिले के 2855 शिक्षामित्रों में निराशा है। शिक्षामित्रों का कहना है कि कम मानदेय, समायोजन रद्द होने और बढ़ती उम्र के बीच यह परीक्षा उनके लिए शिक्षक बनने का एक बड़ा अवसर थी लेकिन अब वह उम्मीद भी टूटती नजर आ रही है।
प्रदेश में करीब 1.42 लाख शिक्षामित्र कार्यरत हैं। विशेष टीईटी के लिए शासनादेश जारी होने के बाद शिक्षामित्रों को उम्मीद जगी थी कि उन्हें भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा। उनका कहना है कि एजुकेटर और विशेष शिक्षकों को इसमें शामिल किया गया लेकिन 26 वर्षों से बेसिक शिक्षा में काम कर रहे शिक्षामित्रों को बाहर रखा गया। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन रद्द हो गया था। इसके बाद से वे दोबारा शिक्षामित्र के पद पर कार्य कर रहे हैं। संगठन के अनुसार, इस दौरान कई शिक्षामित्र सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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विशेष टीईटी में एजुकेटर और विशेष शिक्षकों को शामिल किया गया है लेकिन 26 वर्षों से बेसिक शिक्षा में सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को मौका नहीं दिया गया। संगठन एकल पीठ के फैसले को डबल बेंच में चुनौती देगा। - राम नगीना निषाद, जिला अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ


26 वर्ष से शिक्षामित्र विद्यालयों में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इतने लंबे अनुभव के बाद भी उन्हें विशेष टीईटी से बाहर करना शिक्षामित्रों के लिए बड़ा झटका है। - अविनाश कुमार, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ


25 जुलाई 2017 के बाद से शिक्षामित्रों की स्थिति पहले जैसी नहीं हो सकी है। अब बढ़ती उम्र और कम मानदेय के बीच परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। -रामनाथ, ब्लॉक कोषाध्यक्ष, शिक्षामित्र संघ


शिक्षामित्रों ने अपने जीवन के 26 वर्ष बेसिक शिक्षा को दिए हैं। जब शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी और सुपर टीईटी की प्रक्रिया आई तो शिक्षामित्रों ने तैयारी की। अब विशेष टीईटी में उन्हें शामिल नहीं किया गया। सरकार को कुछ करना चाहिए। - राजनाथ यादव, जिला महामंत्री, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ
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महिला शिक्षामित्रों के सामने भी परिवार की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। बच्चों की पढ़ाई, उच्च शिक्षा और शादी-विवाह के खर्च के बीच 18 हजार रुपये का मानदेय काफी कम है। - सविता राय, जिला महामंत्री महिला प्रकोष्ठ, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ
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