गोरखपुर। जिले में परिवार नियोजन अपनाने वाली महिलाओं की संख्या लगभग स्थिर है, लेकिन गर्भनिरोधक के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के पांचवें और छठे चरण के आंकड़ों के मुताबिक, किसी भी गर्भनिरोधक विधि का इस्तेमाल 63.8 से घटकर 63.7 फीसदी हुआ। वहीं, आधुनिक गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल 48.9 से घटकर 35.7 फीसदी रह गया। इसके विपरीत पारंपरिक विधियों का इस्तेमाल 14.9 से बढ़कर 28 फीसदी हो गया। महिला नसबंदी का आंकड़ा जरूर बढ़ा है। यह 19 से बढ़कर 23.7 फीसदी हुआ है, जबकि पुरुष नसबंदी दोनों सर्वेक्षणों में शून्य रही। जिले के वर्ष 2025-26 के आंकड़े भी पुरुषों की कम भागीदारी की तस्वीर दिखाते हैं। इस दौरान 6,358 महिलाओं की नसबंदी के मुकाबले सिर्फ 15 पुरुषों ने नसबंदी कराई।
रिपोर्ट के अनुसार, परिवार नियोजन की कुल अपूर्ण जरूरत 14.7 से घटकर 11.8 फीसदी हुई है। संतान रोकने की अपूर्ण जरूरत 10.3 से घटकर 6.3 फीसदी रह गई। हालांकि, बच्चों के बीच अंतर रखने की अपूर्ण जरूरत 4.4 से बढ़कर 5.5 फीसदी हो गई है। यानी अब बच्चों की संख्या सीमित करने के साथ उनके बीच उचित अंतर रखने पर भी ध्यान देने की जरूरत सामने आ रही है।
महिलाओं ने बताई अपनी कहानी
कॉपर-टी से मिला लाभ
परिवार नियोजन के फैसले का असर आंकड़ों से आगे महिलाओं की जिंदगी में भी दिखाई देता है। कोतवाली इलाके की दो बच्चों की मां ने बताया कि पहले बच्चे के बाद दूसरा बच्चा तुरंत नहीं चाहती थीं। स्वास्थ्यकर्मी की सलाह पर उन्होंने कॉपर-टी अपनाई। इससे दोनों बच्चों के बीच अंतर रखने का समय मिला और पहले बच्चे की देखभाल के साथ अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे सकीं। वह बताती हैं कि शुरुआत में कॉपर-टी को लेकर मन में कुछ आशंकाएं थीं, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी से जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया।
जरूरत के अनुसार चुना विकल्प
सूरजकुंड की रहने वाली महिला के तीन बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि परिवार नियोजन अपनाने के बाद उन्हें बच्चों की देखभाल और अपनी सेहत पर ध्यान देने में सुविधा मिली। उनका कहना है कि पहले गर्भनिरोधक साधनों को लेकर कई तरह की बातें सुनने को मिलती थीं, लेकिन स्वास्थ्यकर्मी से सही जानकारी मिलने के बाद अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना आसान हुआ।
पुरुष नसबंदी पर अब भी झिझक
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े परिवार नियोजन में पुरुषों की बेहद कम भागीदारी दिखाते हैं। एडीशनल सीएमओ डॉ. विनय पांडेय ने कहा कि परिवार नियोजन केवल महिलाओं की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चों के बीच अंतर रखने और परिवार का आकार तय करने में पुरुषों की बराबर भागीदारी जरूरी है। पुरुष नसबंदी समेत सभी विकल्पों की सही जानकारी देकर भ्रांतियां दूर करने की जरूरत है।
कॉपर-टी और इमरजेंसी पिल को लेकर भ्रांतियां
जिला महिला अस्पताल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम मिश्रा के मुताबिक, गर्भनिरोधक का चुनाव महिला के स्वास्थ्य, उम्र, जरूरत और भविष्य की गर्भधारण योजना के अनुसार होना चाहिए। कॉपर-टी से हमेशा के लिए बांझपन हो जाता है, यह धारणा सही नहीं है। इसे चिकित्सकीय सलाह से हटाया जा सकता है और हटाने के बाद सामान्य रूप से गर्भधारण संभव है।
इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोली को भी नियमित गर्भनिरोधक मानने की गलती होती है। यह असुरक्षित संबंध या गर्भनिरोधक विफल होने जैसी आपात स्थिति में गर्भधारण की आशंका कम करने के लिए है। बार-बार इसकी जरूरत पड़ रही हो तो नियमित गर्भनिरोधक विकल्प के लिए चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
क्यों मनाते हैं विश्व गर्भनिरोधक दिवस
हर वर्ष 26 सितंबर को विश्व गर्भनिरोधक दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गर्भनिरोधक विकल्पों की सही जानकारी और सुरक्षित परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। परिवार नियोजन से अनचाहे गर्भधारण को रोकने के साथ बच्चों के बीच उचित अंतर रखने में मदद मिलती है। इससे गर्भावस्था से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
परिवार नियोजन में रखें ध्यान
- स्वास्थ्य और जरूरत के अनुसार गर्भनिरोधक का चुनाव करें।
- कॉपर-टी प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की मदद से लगवाएं और निकलवाएं।
- इमरजेंसी पिल को नियमित गर्भनिरोधक न मानें।
- किसी दूसरे व्यक्ति के अनुभव के आधार पर गर्भनिरोधक न चुनें।
- परेशानी या असामान्य माहवारी होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
- बच्चों के बीच उचित अंतर रखने की योजना बनाएं।
- परिवार नियोजन में पुरुषों की बराबर भागीदारी सुनिश्चित करें।