गोरखपुर। शिव शक्ति अखाड़ा कानपुर के संस्थापक महंत मधुराम शरण शिवा ने वर्तमान समय में हिंदू समाज के लिए अखाड़ा परंपरा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिव शक्ति अखाड़ा का नियम है कि उसके अनुयायी और संन्यासी शस्त्रधारी होंगे। अखाड़े की ओर से ‘शस्त्र मेव जयते’ का नारा दिया जाता है।
महंत मधुराम शरण शिवा बुधवार को शिवशक्ति लॉन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 21 जातियों के 30 नौजवानों ने सशस्त्र संन्यास लिया है और ‘शस्त्र मेव जयते’ का नारा दिया है। उनके अनुसार, वर्तमान में 30 जिलों के 300 ब्लॉकों में पदयात्रा की जा चुकी है। इस दौरान 200 से 300 युवकों के संगठन तैयार किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इन युवाओं का संगठन विधर्मियों से लड़ने का काम करेगा। उनका दावा है कि कहीं भी हिंदू धर्म के खिलाफ कोई क्रिया होती है तो उसके फलस्वरूप हिंदू युवकों का यह समूह प्रतिक्रिया करेगा।
महंत ने कहा कि आगामी 14 सितंबर से गणेश महोत्सव शुरू होने वाला है। इस दौरान अखाड़ों की ओर से धर्म के प्रति लोगों को जागरूक किया जाएगा। हिंदुओं से अपील की जाएगी कि वे मनोरंजन पर खर्च होने वाली राशि का 25 प्रतिशत शस्त्रों पर खर्च करें, ताकि खत्म हो चुकी अखाड़ा परंपरा को पुनर्जीवित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अखाड़ों के होने से हिंदू युवक साहसी होता था, जबकि आज हिंदू समाज केवल मनोरंजन का साधन बनकर रह गया है। भारत विभाजन की त्रासदी को कोई नहीं भूला है। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू शस्त्रधारी नहीं होगा तो उसके लिए अपना अस्तित्व बचा पाना मुश्किल होगा।