शरद पूर्णिमा का पर्व मंगलवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खीर रखने से चंद्रमा उसे अमृत से भर देते हैं। खीर को सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इससे आरोग्य की प्राप्ति होती है।
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन सूर्योदय 6:19 बजे और चतुर्दशी तिथि शाम 6:41 बजे तक है। इसके बाद प्रदोष काल व पूरी रात पूर्णिमा रहने से इसी दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस रात को महारास किया था, इसलिए इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ उदित होकर अमृत वर्षा करते हैं। इस रात भजन करने वालों पर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वह संसार में भ्रमण कर रात्रि जागरण कर रहे, भक्तों को वैभव प्रदान करती हैं।