उन्होंने कहा कि दुनिया में आधुनिकता बढ़ी है, इस पर संदेह नहीं। सुविधाओं के होने के बावजूद व्यक्ति की सुख प्राप्त करने की इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है इसका कारण यह है कि लोग धर्म का आचरण नहीं कर पा रहे। सुख प्राप्त करने के लिए धर्म का आचरण करना होगा और दुख दूर करने के लिए धर्म का मार्ग छोड़ना पड़ेगा।
धर्म से प्राप्त संस्कार ही बनाते हैं हर कार्य करने में सक्षम
उन्होंने कहा कि धर्म से प्राप्त संस्कार ही हमें हर कार्य करने में सक्षम और लौकिक तथा आध्यात्मिक सुख प्राप्त करने के योग्य बनाते हैं। शंकराचार्य ने सीख दी कि जिस प्रकार हम बच्चों के बाल्यकाल से लेकर उनके युवा अवस्था तक तमाम कार्यों की गणना करते हैं, उसी प्रकार उनके धर्म सम्मत आचरण और आध्यात्मिक ज्ञान को लेकर भी कार्ययोजना बनाकर उसे पूरा करें।
शंकर वचन से पूर्व शंकराचार्य ने श्रीगोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ के वेदपाठी छात्रों और अध्यापकों को आशीर्वाद प्रसाद स्वरूप श्री आद्य शंकराचार्य जी की जीवन कथा व उपदेश की पुस्तिका, उनका प्रतीक विग्रह व वैदिक अंगवस्त्र भेंट किया।
कार्यक्रम की समाप्ति पर उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंग वस्त्र और श्रृंगेरी पीठ से लाई गई स्मृतिका (मां शारदा और आदि शंकराचार्य जी की प्रतिमा) व कलश भेंट किया। इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरिंदर सिंह, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी, विधायक राजेश त्रिपाठी, महेंद्र पाल सिंह, प्रदीप शुक्ला, डॉ विमलेश पासवान सहित कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद और अनेकानेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।