- शब-ए-बरात के लिए उलेमाओं ने की लोगों से अपील, तीन फरवरी को मनाई जाएगी शब-ए-बरात
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। इस्लामी कैलेंडर के माह शाबान की 15वीं तारीख की शब-ए-बरात अदब-ओ-एतहराम के साथ मनाई जाएगी। इस बार यह रात तीन फरवरी को पड़ रही है। मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के टीचर मुफ्ती अख्तर हुसैन ने कहा कि शब-ए-बरात का मायने होता है छुटकारे की रात या निजात की रात। दीन-ए-इस्लाम में इस रात को अहम माना जाता है।
उन्होंने कहा कि हदीस में है कि इस रात में साल भर के होने वाले तमाम काम बांटे जाते हैं। मुसलमान इस रात इबादत कर दुआएं मांगते हैं। फातिहा पढ़कर पूर्वजों के लिए बख्शिश की दुआ करते हैं। उनके नाम से गरीबों को खाना खिलाया जाता है। इस दिन घरों में कई तरह के हलुआ व लजीज व्यंजन पकाए जाते हैं। इस मुबारक रात इबादत में सुस्ती व काहिली न करें। आतिशबाजी खुद जलाना या बच्चों को इसकी आदत डालना गुनाह है। इस रात को फिजूल काम और गपशप में न गुजारें।
सबके लिए मांगे दुआ
मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी ने कहा कि इस रात सबके लिए दुआ करें। इबादत के साथ जकात, सदका और खैरात का खूब सवाब है। जिनकी माली हालात खराब है, उनकी मदद करें। तहज्जुद की नमाज पढ़ना, फर्ज कजा नमाज और नफिल नमाज ज्यादा पढ़ना, दरूदो सलाम की कसरत करना। सूरह यासीन शरीफ की तिलावत करना, नेक काम ज्यादा करना, इबादत में सुस्ती न करना बेहतर है। इस रात तिलावत खूब करनी चाहिए। इस रात के बाद अगले दिन का रोजा रखना अफजल है।