डॉ. वर्मा घर जाने के बाद पूरी सतर्कता के साथ घर में प्रवेश करते हैं और कपड़े घर के बाहर ही निकाल देते हैं। उनकी अपील है कि लोग कोरोना से खुद को सतर्क रखते हुए बचाव करें। फिलहाल सतर्कता ही इसका सबसे बेहतर इलाज है।
जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए कंट्रोल रूम में 64 वर्षीय आयुष चिकित्सक डॉ. मुरली मनोहर अवस्थी सुबह पौने 6 बजे अस्पताल पहुंच जाते हैं और अपराह्न 2.30 बजे तक ड्यूटी करते हैं। कंट्रोल रूम में लगातार फोन पर वह लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। होम आइसोलेशन वाले लोग उनसे आयुष पद्धति से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की जानकारी प्राप्त करते हैं।
उन्होंने बताया, 'जब कोरोना संक्रमण का दौर शुरू हुआ और बाहर से प्रवासी आने लगे तो उनकी ड्यूटी सर्विलांस टीम में लगी थी। पहले थोड़ा सा भय लगा लेकिन बाद में यह समझ में आ गया कि सतर्कता रखेंगे तो बीमारी से बचे रहेंगे।
कोरोना ड्यूटी के पर्यवेक्षण में जुटे अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नीरज कुमार पांडेय, उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी सुनीता पटेल और जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ. मुस्तफा खान ने बताया उम्र की इस दहलीज पर सक्रियता से जुटे सीनियर चिकित्सक काफी सतर्कता से काम करते हैं।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा कि सीनियर सिटीजन की श्रेणी में आ चुके जो चिकित्सक समाज को बचाने के लिए कोरोना काल में योगदान दे रहे हैं, वह समाज के लिए नजीर हैं। ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ाया जाना चाहिए। किसी भी चिकित्सक, पैरामेडिकल या अन्य स्टॉफ के साथ कोरोना ड्यूटी के कारण भेदभाव नहीं होना चाहिए। हम सभी मिल कर इस लड़ाई को अवश्य जीतेंगे।