भटहट (गोरखपुर)। भटहट स्थित आयुष विश्वविद्यालय में चिकित्सा निदान प्रयोगशाला के लिए राष्ट्रीय परीक्षण और अंशशोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) की ओर से एक दिवसीय गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि एनएबीएल के डायरेक्टर पंकज जौहरी ने जागरूकता गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि आयुष विश्वविद्यालय की स्कीम को विश्व पटल पर ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। यहां उत्पादित दवाओं का निर्यात विश्व के कई देशों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सबसे पहले महत्वपूर्ण है कि दवा की गुणवत्ता सबसे अच्छी होनी चाहिए। जांच पड़ताल करने के बाद विदेश भेजने के लिए विचार किया जाना आवश्यक है, ताकि बाहर जाने के बाद कोई कमी न निकले। एनएबीएल सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगशाला है। उन्होंने बताया कि भारत में साढ़े पांच हजार लाइब्रेरी हैं। पिछले 10 वर्षों से यहां लाइब्रेरी की संख्या बड़ी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से किया गया। कुलपति प्रो. के रामचंद्र रेड्डी ने सभी अतिथियों को शॉल और पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डॉ. रमाकांत द्विवेदी, डॉ. लक्ष्मी अग्निहोत्री , मनोरमा, डॉ. मनोज कुमार चौरसिया, डॉ. मनोज कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।
आयुष विश्वविद्यालय बन रहा विश्वस्तरीय
विवि के कुलपति प्रो. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि पिछले नौ महीने से यहां पर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ते हुए वर्तमान समय में 1000 से अधिक है। प्रतिदिन मरीज इलाज करने के लिए आते हैं। साथ ही ऑपरेशन और ओपीडी के अलावा विभिन्न तरह की दवाएं (मधुमेहारी व हिंगवासटक आदि) का आयुष विश्वविद्यालय में उत्पादन किया जाता है।