सबसे ज्यादा शिक्षकों की जरूरत विधि विभाग में है। विधि के अलावा समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र की स्नातक की पढ़ाई होती है। इसके लिए तीन प्रोफेसर और सात असिस्टेंट प्रोफेसर को गेस्ट फैकल्टी बनाकर शिक्षण कार्य कराया गया। विधि विभाग के शिक्षकों ने पढ़ाया अलग से। कुलपति ने करीब तीन लाख रुपये का भुगतान रोक दिया है। साथ ही विभागाध्यक्ष से अध्यापन कार्य को सत्यापित करके भेजने को कहा है, ताकि यह पता चल सके कि शिक्षकों ने जब स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाया तो उस वक्त नियमित कक्षाएं उनके नाम पर तो नहीं थी।
क्या है नियम
उत्तर प्रदेश शासन की नियमावली के मुताबिक स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में अध्यापक के लिए संविदा पर शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। विशेष परिस्थितियों में ही नियमित शिक्षक को आमंत्रित शिक्षक के रूप में बुलाया जा सकता है।
गोविवि में चल रहे स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम
बीजे, एमबीए, बीबीए, बीसीए, बीए-एलएलबी, एमएसएसी (पर्यावरण विज्ञान, बायोटेक्नालॉजी, माइक्रोबायलोजी, इलेक्ट्रानिक्स, गृहविज्ञान), आपदा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
- प्रोफेसर - 14
- एसोसिएट प्रोफेसर -16
- असिस्टेंट प्रोफेसर-18
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के नियमित शिक्षक को अपनी कक्षाएं लेकर कोर्स पूरा कराना है। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ाने को लेकर बहुत भ्रम की स्थिति है। जल्द ही सारी गड़बड़ी ठीक हो जाएगी। यूजीसी की गाइड लाइन के मुताबिक संविदा पर शिक्षक नियुक्त होंगे। पाठ्यक्रम की निगरानी के लिए सेल्फ फाइनेंस कोर्स सेल गठित की गई है। इसमें डायरेक्टर प्रो. शांतनु रस्तोगी को नियुक्त किया गया है। एक डिप्टी डायरेक्टर बाहर से नियुक्त होंगे। यह सेल एक गाइड लाइन बनाएगी, जो सभी पाठ्यक्रम में लागू होंगे। विधि विभाग का भुगतान किया जाएगा, लेकिन उसके लिए अध्यापन कार्य को सत्यापित करके मांगा गया है।