गोरखपुर स्वरोजगार के नाम पर एक से दो दशक पहले हजारों रुपये कर्ज लेकर नहीं चुकाने वालों को अब यह रकम ब्याज के साथ चुकानी होगी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ऐसे करीब 200 डिफाल्टर लाभार्थियों से वसूली की तैयारी कर रहा है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने बताया कि अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम की ओर से अल्पसंख्यक वर्ग (मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन) के युवाओं को स्वरोजगार के लिए कम वार्षिक ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। निगम की ओर वर्ष 1996 से 2006 के बीच जिले में करीब 400 अल्पसंख्यक युवक-युवतियों को 20 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक स्वरोजगार के लिए ऋण जारी किया था।
इनमें से करीब 200 लोगों ने समय पर किस्तें चुका दी थीं। बकाया करीब 200 लोगों में से कुछ ने एक दो किस्तें ही चुकाईं बाकी ने धन नहीं लौटाया। इनमें से अधिकतर ने 20 हजार से 60 हजार रुपये कर्ज लिया था जबकि करीब दो दर्जन लोगों ने एक लाख रुपये का कर्ज लिया था। समय पर किस्तें नहीं चुकाने के कारण इन बकायेदारों पर मूलधन और ब्याज मिलाकर रकम ढाई से तीन गुना हो चुकी है।
शासन के पत्र का हवाला देते हुए बताते हैं कि भारत सरकार तथा राज्य सरकार की ओर से वितरित किए गए टर्मलोन, मार्जिन मनी, ब्याज रहित ऋण तथा शैक्षिक ऋण का मूलधन और ब्याज राशि को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा माफी का कोई प्राविधान नहीं किया गया है। इस आधार पर वसूली का नोटिस भेजा जा रहा है।
नोटिस के बाद भी यदि लाभार्थियों ने ब्याज सहित मूलधन नहीं लौटाया तो जल्द ही अभियान चलाकर वसूली की जाएगी। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने सभी लाभार्थियों से अपील की है कि वह 30 जून तक अपना बकाया जमा करवा दें अन्यथा उनकी संपत्ति जब्त करने की संस्तुति की जाएगी।