जंगल कौड़िया । दो जिंदा बुजुर्गों को सरकारी अभिलेखों में मृत घोषित कर उनकी पेंशन रोकने के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है। कमिश्नर इंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर सीडीओ शाश्वत त्रिपुरारी की ओर से कराई गई जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही सामने आने के बाद फुलवरिया की ग्राम पंचायत अधिकारी प्रिया साहनी को निलंबित कर दिया गया है।
जंगल कौड़िया ब्लॉक के फुलवरिया निवासी राधेश्याम और कहरपुरवा के रामकेशर ने अधिकारियों को दस्तावेज सौंपकर खुद को जिंदा बताकर जांच कराने की मांग की थी। मामला सामने आने पर कमिश्नर इंद्र विक्रम सिंह ने मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी से जांच कर रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद अधिकारियों ने दोनों बुजुर्गों के दस्तावेज की जांच शुरू की गई। अधिकारियों ने पेंशन रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच शुरू की। मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश पर खंड विकास अधिकारी सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने दोनों लाभार्थियों के दस्तावेज का सत्यापन कराया। जांच में दोनों बुजुर्ग जीवित पाए गए। इसके बाद बीडीओ ने नोटिस जारी कर सहायक विकास अधिकारी समाज कल्याण से भी स्पष्टीकरण मांगा था। बीडीओ सुरेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित सचिव को निलंबित किया है। जंगल कौड़िया के कहरपुरवा गांव के बुजुर्ग का आधार सत्यापित नहीं था। दोनों बुजुर्ग पेंशन के पात्र हैं। संबंधित आख्या जिला समाज कल्याण अधिकारी को भेजी जा चुकी है।
सत्यापन में गलत रिपोर्ट लगाने समेत कई आरोप : जिला पंचायत राज अधिकारी सौम्य शील सिंह की ओर से जारी निलंबन आदेश में ग्राम पंचायत अधिकारी प्रिया साहनी पर वृद्धावस्था पेंशन के सत्यापन में गलत रिपोर्ट लगाने, विभागीय कार्यों में रुचि नहीं लेने, कर्मचारी आचरण नियमावली के विपरीत काम करने और अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना का उल्लेख है। इन्हीं आरोपों के आधार पर उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।