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माध्यमिक विद्यालयों का खेल सत्र शून्य होने की कगार पर

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माध्यमिक विद्यालयों का खेल सत्र शून्य होने की कगार पर
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गोरखपुर। माध्यमिक विद्यालयों के खिलाड़ियों की इस साल राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में शामिल होने की मंशा पर पानी फिर गया है। कोरोना के कारण स्कूली खेल व राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन नहीं हुआ। ऐसे में इस बार का खेल सत्र शून्य होने के कगार पर है। ऐसे में इंटर के छात्र इस बार बिना खेल स्पर्धाओं में भाग लिए बिना ही विदा हो जाएंगे।
सरकार जिले में खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिवर्ष सत्तर लाख रुपये का बजट देती है। खिलाड़ी स्कूली खर्चे पर ही विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करते हैं। राज्य स्तरीय खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ही राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में शामिल होने का अवसर मिलता है। राज्य स्तरीय खेलने वाले सभी खिलाड़ियों को प्रमाणपत्र मिलता है, जिसका सीधा फायदा उन्हें अगली कक्षाओं में नामांकन के साथ ही नौकरी में मिलता है।
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तीन तरह की होती हैं प्रतियोगिताएं
पढ़ाई के साथ-साथ खेल में रुचि रखने वाले छात्रों के चयन के लिए सरकार प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय प्रतियोगिता कराती है। अंडर 14 में कक्षा आठ, अंडर 17 में कक्षा नौ व दस तथा अंडर 19 में कक्षा 11 व 12 के छात्र प्रतिभाग करते हैं। स्कूलों में छात्रों को चयनित करने के लिए विशेष खेल शिक्षक होते हैं, जो जनपद स्तर पर ट्रायल के जरिये अच्छे खिलाड़ियों का चयन करते हैं।
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माध्यमिक विद्यालयों की खेलकूद प्रतियोगिता को लेकर शासन स्तर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। इसी वजह से प्रतियोगिता का आयोजन नहीं कराया जा सका है। निर्देश मिलते ही प्रतियोगिता का आयोजन कराया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया, जिला विद्यालय निरीक्षक
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