गोरखपुर। नार्मल स्थित हजरत मुबारक खां शहीद के सालाना उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को दरगाह परिसर रूहानियत और अकीदत के रंग में रंगा नजर आया। चारों ओर इबादत, दुआ और मोहब्बत का माहौल रहा, जहां हर मजहब और तबके के लोग एक साथ नजर आए। यह नजारा गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल पेश करता दिखा, जहां से अमन-ओ-मोहब्बत का पैगाम मिला।
घोष कंपनी क्षेत्र से इरशाद बग्घी के मकान से निकली सरकारी चादर को पार्षद समद गुफरान ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। चादर और गागर शहर के विभिन्न इलाकों से होते हुए पूरे अदब के साथ दरगाह पहुंची। रास्ते भर अकीदतमंदों ने जगह-जगह चादर का स्वागत किया। दरगाह परिसर में लगे मेले में रौनक दिखी।
उर्स के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में इमामबाड़ा स्टेट के गद्दीनशीन सैय्यद अदनान फारूख अली शाह के साहबजादे सैय्यद अयान अली शाह मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि इमामबाड़ा स्टेट हमेशा से अमन, शांति और भाईचारे का संदेश देता आया है और ऐसे रूहानी आयोजन समाज में एकता को मजबूत करते हैं।
दरगाह सदर इकरार अहमद ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब की शिक्षाएं इंसानियत, शांति और करुणा पर आधारित हैं। सच्चा मुसलमान वही है, जिसके हाथ और जुबान से किसी को तकलीफ न पहुंचे।
जुलूस और कव्वाली से सजी महफिल
शाम को मियां बाजार से सरकारी चादर व गागर का जुलूस निकाला गया, जो मियां बाजार, कोतवाली रोड और जीलानी गली से होते हुए दरगाह पहुंचा। मजार पर चादर पेश कर दुआएं मांगी गईं। रात में लिटिल चैंप अजमत आफताब वारसी और उत्तराखंड के कव्वाल इंतेजार साबरी ने शानदार कव्वाली पेश कर समां बांध दिया। पूरी रात चले कार्यक्रम में अकीदतमंद झूमते नजर आए।
आज होगा समापन
उर्स का समापन शुक्रवार को होगा। नमाज-ए-जुमा के बाद लंगर वितरण किया जाएगा। रात में अंतरराष्ट्रीय कव्वाल सैम अली नियाजी (बदायूं) और इंतेजार साबरी के बीच कव्वाली मुकाबला विशेष आकर्षण रहेगा।