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लापता बेटे की तलाश में दर-दर भटक रहे हरिश्चंद्र, फिर भी 2013 से अब तक नहीं मिला न्याय

Wed, 04 Mar 2020 01:25 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • पांच साल बाद पुलिस का दिल पसीजा तो दर्ज की थी गुमशुदगी
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लापता मोनी के पिता हरिश्चंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड त्रासदी में लापता मोनी के पिता हरिश्चंद्र ठठेरा न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं। 2013 से अब तक वह मुख्यमंत्री कार्यालय, प्रमुख सचिव, कमिश्नर और जिलाधिकारी के पास सैकड़ों बार जा चुके हैं, फिर भी नतीजा नहीं निकला। बेटा लापता होने के पांच साल बाद पुलिस का दिल जरूर पसीजा और मोनी की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज हुई है।
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गोरखनाथ थाने में दर्ज गुमशुदगी के मुताबिक हुमायूंपुर उत्तरी जागेश्वर पासी चौराहा निवासी हरिश्चंद्र ठठेरा का बेटा मोनी (25) जून 2013 में केदारनाथ धाम गया था। इसी दौरान जल प्रलय आया और सब कुछ तहस नहस हो गया। भयंकर त्रासदी के बाद से मोनी लापता है। तभी से पिता हरिश्चंद्र ठठेरा तीन बार उत्तराखंड जाकर लौट आए, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। हरिश्चंद्र का दावा है कि उत्तराखंड त्रासदी में बेटे की मौत हो चुकी है। सरकार यह मान रही कि वह लापता हुआ था, लेकिन मौत स्वीकार करने का तैयार नहीं।
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गढ़वाल मंडल पौड़ी के आयुक्त डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने जून 2019 में रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी से रिपोर्ट तलब की थी। यह रिपोर्ट आई या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। हरिश्चंद्र का कहना है कि लापता बेटे की तलाश करके थक चुका हूं। भाजपा पार्षद ऋषि मोहन वर्मा वर्ष 2016 से ही न्याय दिलाने के प्रयास में लगे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय से उत्तराखंड सरकार को पत्र भी भिजवाया गया, लेकिन सकारात्मक नतीजा सामने नहीं आया।

लापता व्यक्तियों की सूची में था मोनी का नाम
मोनी के लापता होने का मामला उप जिलाधिकारी सदर कार्यालय भी पहुंचा था। उप जिलाधिकारी ने जो रिपोर्ट दी है, उसके मुताबिक उत्तराखंड सरकार की ओर से गोरखपुर जिला आपदा कार्यालय को मिली लापता व्यक्तियों की सूची में मोनी का नाम था, लेकिन उनकी मृत्यु की पुष्टि नहीं की गई थी। इस कारण सहायता राशि मुहैया कराने का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका। यदि लापता मोनी के मौत की पुष्टि हो जाती तो हरिश्चंद्र ठठेरा को सरकार की ओर से सात लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल जाती। 
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