गोरखपुर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीकांत तिवारी ने कहा है कि समुदाय के बीच आशा कार्यकर्ता की मदद से कुष्ठ और कालाजार के रोगियों को ढूंढ कर समय से इलाज उपलब्ध करवाया जाए। समय से बीमारी की पहचान और अति शीघ्र इलाज की मदद से इन दोनों बीमारियों का उन्मूलन किया जा सकता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि यह बात समुदाय के बीच जानी चाहिए कि कुष्ठ और कालाजार का निःशुल्क इलाज उपलब्ध है, इसलिए लक्षण दिखने पर लोग बीमारी की जांच अवश्य करवाएं। उन्होंने बताया कि सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), पाथ, पीसीआई और जीएचएस जैसी स्वयंसेवी संस्थाएं भी इन बीमारियों की रोकथाम में मदद कर रही हैं।
संवेदनशील मंडल है गोरखपुर
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कालाजार के दृष्टि से गोरखपुर मंडल संवेदनशील है, हांलाकि गोरखपुर जिले में इस वर्ष सिर्फ एक केस सामने आया है। पूरे मंडल में कुल 36 केस हैं, जिनमें सबसे ज्यादा देवरिया और कुशीनगर जिले के हैं। चूंकि इन जिलों से प्रवास भी गोरखपुर में होता है, इसलिए जनपद में भी अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से छह फीट ऊंचाई तक ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर पर काला चकत्ता पड़ जाता है।