उधर, आईजी रेंज ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सूदखोरों पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया है। एक हफ्ते में पुलिस को सूदखोरों की थानेवार सूची तैयार कर उस पर कार्रवाई करनी है। पुलिस यह भी जानने की कोशिश करेगी कि आखिर सूदखोर किस तरह से वसूली करते हैं और सूद पर रुपये देने के लिए गिरवी के तौर पर कैसे और क्या रखते है। पूरी विस्तृत रिपोर्ट आईजी ने एक हफ्ते में मांगी है।
आईजी जे. रविंद्र ने कहा कि सूदखोरों पर कार्रवाई के लिए रेंज के सभी एसपी को निर्देशित किया गया है। एक हफ्ते में थानेदार अवैध सूदखोरों की सूची मांगी गई है। विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भतीजा बोला- सूदखोर चाचा को प्रताड़ित कर रहे थे
पुलिस को दी तहरीर में अभिषेक ने लिखा है, इस सामूहिक हत्याकांड से पहले गांव के सूदखोरों से परेशान होकर मेरे पिता जय बहादुर मौर्य गांव छोड़कर 3 साल पहले लापता हो गए। मेरे गांव के संदीप मौर्य ने मेरे पिता को सूद पर रुपए दिया था। जिसके ब्याज के एवज में उसने मेरे पिता के हिस्से का खेत और जमीन रजिस्ट्री करा ली। जबकि, उस जमीन का बकाया 15 लाख रुपए भी संदीप ने अब तक नहीं दिया।
विजय और संदीप हड़पना चाहते थे चाचा की जमीन
उसने तहरीर में यह भी कहा है, मेरे चाचा इंद्र बहादुर सिंह को इसी गांव के विजय प्रताप सिंह, संदीप मदृदेशिया ने सूद पर रुपए दिए थे। जिसका ब्याज नहीं चुका पाने पर वह सभी चाचा को प्रताड़ित कर रहे थे। सूदखोर चाहते थे कि पिता की तरह मेरे चाचा भी अपने हिस्से की जमीन और खेत उनके नाम रजिस्ट्री कर दें। देवकली गांव में इंद्रबहादुर ने पत्नी और बच्चों की हत्या के बाद घर में ही खुद को आग लगा ली।
इंद्र बहादुर सब्जी का थोक व्यापारी था। घर के अलावा करीब 4 हजार वर्ग फीट जमीन भी थी। बाकी वह गांव के लोगों से बंटाई पर खेत लेकर सब्जी की खेती करता था। सब्जी को थोक मंडी में बेचता था। कारोबार के साथ इंद्र बहादुर को जुए और शराब की लत थी। वह जितना कमाता था, उसे बर्बाद कर देता था।
जुआ खेलने के लिए उसने ब्याज पर काफी कर्ज ले रखा था। सूदखोर कर्ज के एवज में उसकी जमीन और मकान लिखवाना चाहते थे। इसलिए, इंद्र बहादुर जब भी सूदखोरों से कर्ज मांगता था तो वह उसे रुपए मुहैया करा देते थे। लेकिन, पत्नी सुशीला किसी भी हाल में घर और खेत बिकने नहीं देना चाहती थी। इस बात को लेकर परिवार में अक्सर विवाद और मारपीट होती थी।