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चोरी की फरियाद लेकर थाने गए सराफ को थाने से लौटाया

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चोरी की फरियाद लेकर थाने गए सराफ को थाने से लौटाया
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गोरखपुर। दुकान से सोने का लाकेट चोरी होने के बाद फरियाद लेकर शाहपुर थाने पहुंचे एक फरियादी को न्याय देने की जगह पुलिस ने लौटा दिया। थोड़ी देर बाद वह सीसी टीवी कैमरे में कैद चोरी की तीन महिला आरोपितों की फुटेज लेकर पहुंचे तो भी केस दर्ज नहीं किया गया और तहरीर पर मोहर मारकर फिर लौटा दिया। परेशान सराफ ने खुद ही महिला आरोपितों की पहचान खोज ली और एसएसपी से गुहार लगाई है। मामला संज्ञान में आने के बाद एसएसपी ने जांच का आदेश दे दिया है।
जानकारी के मुताबिक, राजघाट के हांसूपुर निवासी नीलमणि वर्मा की शाहपुर के बिछिया में राज ज्वेलर्स के नाम से दुकान है। उनकी दुकान पर 13 जनवरी की दोपहर में दो बजे के करीब तीन महिलाएं आईं। उन्होंने पायल और सोने का लाकेट दिखाने को कहा। फिर नीलमणि को बातचीत में उलझाकर लाकेट चोरी कर लिया। गहने पसंद ना आने की बात कहते हुए महिलाएं चली गईं। उस समय दुकानदार ने ध्यान नहीं दिया। शाम को ग्राहक आने पर उन्होंने लॉकेट का डिब्बा खोला तो उसमें से लाकेट गायब था। फिर उन्होंने सीसी कैमरे की फुटेज देखा तो पता चला कि दोपहर में आई महिलाओं ने ही लाकेट चोरी कर लिया है। घटना की जानकारी फोन से उन्होंने शाहपुर पुलिस को दी।
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बृहस्पतिवार सुबह सीसी फुटेज के साथ तहरीर लेकर थाने पहुंचे तो बात सुनने के बाद पुलिसकर्मियों ने तहरीर पर मुहर लगाकर भेज दिया। परेशान सराफ ने कुशीनगर के हेतिमपुर में ज्वेलरी की दुकान चलाने वाले अपने रिश्तेदार से संपर्क किया और पूरी बात बताई। फुटेज की तस्वीरें उनको भेजी। फुटेज देखने के बाद उन्होंने बताया कि छह दिन पहले यह तीनों उनकी दुकान में चोरी करते हुए पकड़ी गई थीं। लेकिन पुलिस ने समझौता कराके छोड़ दिया था। दुकान में चोरी करने वाली तीनों महिलाएं कैंट क्षेत्र के इंजीनियरिंग कालेज की रहने वाली हैं। थानेदार शाहपुर संतोष सिंह ने बताया कि वह वीआइपी ड्यूटी में थे। इस वजह से सराफ से उनकी मुलाकात नहीं हुई थी। मामले में कार्रवाई की जाएगी।
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काश कुशीनगर पुलिस ने की होती कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण में गोरखपुर पुलिस के साथ ही कुशीनगर पुलिस की लापरवाही भी उजागर हो गई है। छह दिन पहले चोरी करने वाली महिलाएं कुशीनगर में पकड़ी गई थी लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने की जगह मामले को रफा दफा करवा दिया। पुलिस की इसी चूक का खामियाजा गोरखपुर के व्यापारी ने भुगता है। अगर कुशीनगर पुलिस ने कार्रवाई की होती तो महिलाएं जेल में होती और वह गोरखपुर में वारदात नहीं कर पाती। ना ही उनकी हिम्मत होती। लेकिन एक बार थाने से छूटने के बाद उनका मनोबल बढ़ा और फिर गोरखपुर में उन्होंने वारदात को अंजाम दिया है।
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