धान की फसल दिखाती संगीता।
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श्री विधि (एस.आर.आई) धान की खेती की एक पद्धति है। इस विधि का इजाद 1983 में अफ्रीका के मेडागास्कर में एक चर्च के पादरी हेनरी ने किया था। । यह विधि हमारे परंपरागत विधि बोवाई और रोपाई से भिन्न है। इसमें पौधो की रोपाई 10 इंच की समान दूरी पर लाइन में की जाती है। इस विधि के तहत 10 से 12 दिन के या दो पत्तों के पौधों को लगाया जाता है। एक बार में एक ही पौधे को लगाया जाता है।
दो से तीन गुना ज्यादा होती है उपज
श्री विधि में एक एकड़ खेत में धान रोपने के लिए सिर्फ 2 किलो बीज की आवश्यकता होती है क्योंकि एक किलोग्राम धान में लगभग चालीस हजार दाने होते हैं। इस तरह दो किलो बीज में अस्सी हजार दाने होते हैं जबकि एक एकड़ खेत में दस इंच की दूरी पर एक-एक पौधा लगाने में लगभग चौंसठ हजार पौधों की आवश्यकता पड़ती है।
इसके लिए दो किलो बीज पर्याप्त है। श्री विधि में प्रति पौधे में औसतन 40 से 50 कल्ले निकलते हैं, जो अधिकतम 80 तक जा सकते हैं, इस विधि से खेती करने से परंपरागत विधि की तुलना में 2 से 3 गुणा ज्यादा उपज होती है।
श्री विधि के अन्य फायदें
- इस विधि से खेती में पानी का इस्तेमाल कम करना पड़ता है।
- हर किस्म के धान को इस विधि से लगाया जा सकता है।
- बीमारियों और कीटों का प्रकोप कम होता है।