गोरखपुर जनपद में लगभग आठ हजार हेक्टेयर में सरसों की बुआई की गई है। यह पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। लेकिन, केवल एक किसान ने सरसों की फसल का बीमा कराया है। बरसात और ओला गिरने से सरसों की फसल को बहुत नुकसान हुआ है। बीमा न कराने के कारण अन्य किसानों को उसका लाभ नहीं मिलेगा।
तिलहन उत्पादन कम होने के कारण खाद्य तेल का दाम लगातार बढ़ता गया। माना जा रहा है कि खाद्य तेल के आयात के कारण महंगाई भी तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए जनपद में पिछले साल की तुलना में इस साल सरसों की बुआई किसानों ने अधिक की है। पिछले साल जनपद में सरसों की बुआई 3765 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की गई थी।
इस साल उसका रकबा बढ़कर 7765 हेक्टेयर हो गया है। गेहूं की फसल का किसानों ने बीमा कराया है। आपदा में नुकसान होने पर उसका मुआवजा बीमा कंपनी देगी। लेकिन, जिन किसानों ने सरसों की खेती की है, उनमें से एक को छोड़कर किसी ने बीमा नहीं कराया है।
बीमा कंपनी के स्थानीय प्रबंधक धर्मेंद्र कुशवाहा ने बताया कि हाल ही में बारिश और ओला पड़ने से सरसों की फसल को नुकसान हुआ है। गेहूं की फसल काफी छोटी होने के कारण उसको नुकसान नहीं के बराबर हुआ है। उन्होंने बताया कि सरसों की फसल का बीमा 0-0431 हेक्टेयर का सहजनवां ब्लॉक के भरसाड़ गांव के नेबूलाल ने कराया है। इसके लिए उन्होंने 25 रुपये जमा किया था। इस हिसाब से उनको बीमा की राशि 1698 रुपये मिलेगी।
उन्होंने बताया कि ओला या बारिश से सरसों की फसल का नुकसान यदि हुआ है तो इसकी सूचना बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर पर 72 घंटे के अंदर देनी होगी या किसान इसकी सूचना जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय में लिखित रूप से दें। बीमा कंपनी की तरफ से उसकी जांच कराई जाएगी। नुकसान हुआ है तो उसका भुगतान कंपनी करेगी।