चीनी परता (प्रति क्विंटल गन्ने से चीनी उत्पादन की मात्रा) बढ़ाने के उपायों पर शोध के लिए पिपराइच मिल ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की मदद ली है। एमएमएमयूटी के शिक्षकों व छात्रों का एक समूह मिल की तकनीकी के अलावा गन्ने की प्रजातियों का भी परीक्षण करेगा।
गोरखपुर मंडल में नौ चीनी मिलें हैं, जिनमें सर्वाधिक पांच मिलें कुशीनगर जिले में हैं। इसके अलावा महराजगंज में दो तथा गोरखपुर व देवरिया में एक-एक मिल है। कुशीनगर की हाटा, कप्तानगंज, रामकोला व सेवरही मिलों का परता 11 प्रतिशत से अधिक है। वहीं गोरखपुर की पिपराइच में नई मिल लगने के बावजूद परता 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ़ पा रहा है। इसका असर मिल की आर्थिक क्षमता पर पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन रहीं कुशीनगर की छितौनी, लक्ष्मीगंज, रामकोला खेतान समेत अधिकांश मिलें कम परता के चलते ही बंद हुई थीं। पिपराइच की पुरानी मिल भी केवल कम परता के चलते ही घाटे में चली गई थी। इसलिए नई चीनी मिल को घाटे से बचाने के लिए बिजली उत्पादन के साथ-साथ एथेनॉल फैक्ट्री लगाने का निर्णय लिया गया था।
पिपराइच चीनी मिल के महाप्रबंधक जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि मिल की चीनी परता को बढ़ाने के लिए एमएमएमयूटी की एक टीम रिसर्च कर रही है। इस साल भी मिल का परता 10 से नीचे रहा है। चीनी उत्पादन कम होने से मिल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। रिसर्च टीम ने मिल की तकनीकी समेत कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रिपोर्ट बनाने की बात कही है।