जज्बे को सलाम...संघर्ष और हुनर से हासिल किया मुकाम
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: खुद की संवारी जिंदगी, दूसरों को भी दिए रोजगार के अवसर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। जिले की कुछ ऐसी महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष और हुनर से समाज में एक मुकाम हासिल किया है। इन महिलाओं न सिर्फ खुद की जिंदगी संवारी, बल्कि अपने साथ और महिलाओं को जोड़कर उन्हें रोजगार का अवसर मुहैया कराया। अपने संघर्ष से तपकर सोना बनीं इन महिलाओं की कहानियां दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत है।
रोली ने हासिल किया मुकाम
कौड़ीराम की रहने वाली रोली गुप्ता ने पैरालिसिस के अटैक के बाद भी न सिर्फ अपने को संभाला, बल्कि हौसलों के उड़ान की बदौलत अपना मुकाम भी हासिल किया। आज वह अपने भाइयों के साथ परिवार का संबल बनी हुई हैं। जेएसआर प्राइवेट लिमिटेड की डायरेक्टर रोली नारायण ने रामगढ़ताल में जेएसआर नाम प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसमें दुकान के साथ एक औषधीय पार्क भी शामिल है। पूरे प्रोजेक्ट का काम रोली ने अपनी निगरानी में इलेक्टि्क व्हीलचेयर से घूमकर पूरा कराया।
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समाज सेवा में लगी रहती हैं वंदना
वंदना सराफ को शुरू से बिजनेस का शौक रहा है। छोटी उम्र में पिता के साथ व्यवसाय में हाथ बंटाना शुरू कर दिया था। ग्रेजुएशन पूरा होने पर उनकी शादी व्यवसायी अतुल सराफ से हुई। शादी के बाद वंदना ने घर के कामों को निपटाने के बाद पति के कारोबार में सहयोग करना शुरू कर दिया। वंदना समाज सेवा से अपनी पहचान बना चुकी है। वंदना महिलाओं के साथ गरीबों के लिए कार्य करती हैं। वाॅटर कूलर लगवाना, सामूहिक विवाहों में सहयोग के कार्याें में वंदना हमेशा जुटी रहती हैं।
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कमाल का है जागृति का जज्बा
शहर के गीता वाटिका की रहने वाली 68 की उम्र में जागृति कैंसर से लड़कर अब छोटे बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रही हैं। 50 की उम्र में जागृति ने कैंसर की जंग जीतने के बाद अपना समय जिम में बिताना शुरू किया। इसके बाद मार्शल आर्ट सीखा और अब छोटे बच्चाें को उसकी ट्रेनिंग दे रही हैं। जागृति को मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट भी मिल चुका है। इसके साथ ही को पांचवें उत्तर प्रदेश स्टेट कूडो चैंपियनशिप में पुरस्कार मिल चुका है। बुजुर्ग होने के बाद भी लोग उनके जज्बे को देख उनकी जमकर सराहना करते हैं।
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गरीब बेटियों का विवाह कराती हैं सुधा मोदी
सुधा मोदी समाजसेवा के के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। सुधा गोरखपुर की विभिन्न महिला संगठनों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा कर चुकी है। नई आशा संस्था के माध्यम से वह गरीब बेटियों का विवाह करा रही हैं। इसके साथ ही वह सामाजिक सेवाएं में लगी हुई हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें अग्रवाल रत्न, कवि साहित्यकार रत्न, उद्यमी महिला रत्न सहित दर्जनों सम्मान मिल चुके हैं।
डेफ ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीत चुकी हैं आदित्या
शहर के बिछिया रहने वाली आदित्या यादव जन्म से ही मूकबधिर हैं। उनके पिता दिग्विजय यादव ने चार साल की उम्र से आदित्या को बैडमिंटन का अभ्यास कराना शुरू कर दिया। आदित्या ने भी अपने पिता को कभी निराश नहीं किया और डेफ ओलंपिक, डेफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में में देश के लिए मेडल जीत लोगों के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। हाल ही में उनके खेल के लिए प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
इनकी उपलब्धियों को भी सलाम
संगीता पांडेय ने उद्योग, विजय लक्ष्मी ने कबड्डी कोच, खुश्बू मोदी ने समाजसेवा, शमीम एजाज व मुदिता ने स्वरोजगार, शगुन कुमारी ने टेनिस एवं दीक्षा तिवारी ने हॉकी में नाम कमाया है। सुमन जंगलों के बीच अभ्यास करके नेशनल एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग ले चुकी हैं। वहीं पूजा प्रजापति ने बस चलाकर एक नई सोच दी, जबकि रीतिका और संगीता रावत स्वयं सहायता समूह चलाकर महिलाओं को रोजगार मुहैया करा रही हैं। तुलिका त्रिपाठी और करुणा भदानी ने समाज सेवा का बीड़ा उठाया है तो राधिका यू-ट्यूबर हैं और इनके फॉलोअर की संख्या ज्यादा है।
अमर उजाला संवाद कार्यक्रम आज
गोरखपुर। महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे अमर उजाला के सिटी ऑफिस में संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसमें शहर की महिलाएं मौजूद रहेंगी, जो महिला अधिकार और वास्तविक स्थिति पर अपने विचार रखेंगी।