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गोरखपुर: जमीन की खतौनी ठीक कराने के लिए दौड़ रहे शख्स ने तहसील परिसर में तोड़ा दम, मचा हड़कंप

Sun, 18 Jul 2021 10:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास राग दरबारी में तहसीलों व सिस्टम की लाचारी बताई गई है। लिखा गया कि एक किसान खतौनी ठीक कराने के लिए दौड़ते-दौड़ते मर गया। यही अब भी देखने को मिल रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गोरखपुर जिले में अपनी जमीन की खतौनी ठीक कराने और कब्जा पाने के लिए सात साल से दौड़भाग कर रहे खुटभार के साधु शरण विश्वकर्मा (65) ने शनिवार को खजनी तहसील परिसर में दम तोड़ दिया। इस घटना से सनसनी फैल गई। आनन-फानन उपजिलाधिकारी पवन कुमार मौके पर आए। उपजिलाधिकारी ने परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली, फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। बताया गया कि बुजुर्ग की मौत हार्ट फेल होने से हुई है। हालांकि सब कुछ पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ होगा।

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जानकारी के मुताबिक, साधु शरण के पास 34 डिसमिल जमीन थी। इसमें से 11 डिसमिल जमीन वर्ष 2014 में बेच दी थी। जमीन का कुछ हिस्सा भले बेचा था लेकिन खतौनी से साधु शरण का नाम ही कट गया था। इस बीच साधु शरण ने 2016 में एक कारोबारी से जमीन का सौदा तय कर लिया। एग्रीमेंट भी हो गया। मृत बुजुर्ग की पुत्र वधु व पोती ज्योति के मुताबिक जमीन का एग्रीमेंट हुआ लेकिन पैसे का भुगतान नहीं किया गया। जमीन का सौदा तय करने वालों ने साधु शरण को कानूनी दांवपेंच में उलझा दिया।

नोटिस भेजकर सारी जमीन पर अपना दावा ठोंक दिया। इससे साधु शरण परेशान रहने लगे। वह 2014 से खतौनी में नाम ठीक कराने के लिए दौड़भाग करने लगे। 2018 में साधु शरण का नाम खतौनी में चढ़ गया लेकिन कब्जा नहीं मिल सका। वह जब भी जमीन पर कब्जा लेने गए, तभी कुछ दबंग आ धमके। कब्जा लेने से रोका और यह भी कहा कि जमीन बिक चुकी है। यह सिलसिला लंबे समय से चलता रहा। शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया जाना था। लिहाजा, बुजुर्ग साधु शरण न्याय पाने की उम्मीद के साथ सुबह 11 बजे तहसील परिसर आ गए थे लेकिन न्याय नहीं मिल सका। तहसील परिसर में ही बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। पोती ज्योति ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
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सिस्टम की लाचारी सामने आई

साहित्यकार श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास राग दरबारी में तहसीलों व सिस्टम की लाचारी बताई गई है। लिखा गया कि एक किसान खतौनी ठीक कराने के लिए दौड़ते-दौड़ते मर गया। यही अब भी देखने को मिल रहा है। सिस्टम की लाचारी की वजह से ही साधु शरण ने तहसील परिसर में दम तोड़ दिया लेकिन न्याय नहीं मिल सका। अब पुत्रवधु व पोती को भी अनहोनी का डर है। उनका कहना है कि जमीन कब्जाने वाले खतरनाक हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं।

भू-माफिया की जाल में फंस गए थे साधु शरण
तहसील परिसर में दम तोड़ने वाले साधु शरण भू-माफिया की जाल में फंस गए थे। बताया जाता है कि साधु की बेशकीमती जमीन पर ही भू-माफियाओं की निगाह पड़ गई थी। वह किसी भी हाल में जमीन छीनना चाहते थे। इसके लिए साम, दाम व दंड का सहारा लिया गया। बुजुर्ग साधु शरण के पास प्रशासनिक मदद के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। लिहाजा, वह न्याय पाने के लिए प्रशासनिक अफसरों का चक्कर काट रहे थे। चक्कर काटते-काटते थक गए और मौत हो गई।

पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम
तहसील परिसर में मौत के बाद साधु शरण का पंचनामा भरवाया गया, फिर शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। इसकी सूचना खजनी पुलिस को भी दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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